कानपुर IIT ने विकसित की नैनोपार्टिकल, फसल में लगने वाली बीमारियों की करेगा रोकथाम

Ruchi Sharma, Last updated: Thu, 3rd Mar 2022, 1:38 PM IST
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के शोधकर्ताओं की एक टीम में विशेष रूप से धान की फसलों में लगने वाले जीवाणु के संक्रमण से बचाने के लिए नैनो पार्टिकल-बेस बायो-डिग्रेडेबल कार्बोनोइड मेटाबोलाइट (बायोडीसीएम) विकसित किया है. 
कानपुर IIT

कानपुर. किसानों के सामने आने वाली समस्याएं कई ज्यादा है. इसको देखते हुए बदलते समय के साथ किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है. इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के शोधकर्ताओं की एक टीम में विशेष रूप से धान की फसलों में लगने वाले जीवाणु के संक्रमण से बचाने के लिए नैनो पार्टिकल-बेस बायो-डिग्रेडेबल कार्बोनोइड मेटाबोलाइट (बायोडीसीएम) विकसित किया है. नैनो तकनीक बायोडीसीएम मुख्य रूप से धान की फसल को कवक और जीवाणु रोगों से बचाता है. नवीन नैनो कणों का आविष्कार फसलों, विशेष रूप से चावल की फसल को संक्रमण और बीमारियों से बचाने के लिए ढाल के रूप में हो सकेगा.

इस नैनो तकनीक का शोध कार्य आईआईटी कानपुर में जैव विज्ञान औऱ जैव-इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत संतोष मिश्रा और पीयूष कुमार के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने नैनो पार्टिकल आधारित बायो डिग्रेडेबल कार्बोनाइड मेटाबोलाइट (बायो डीसीएम) विकसित किया है.

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फसल की बीमारियों से करेगा बचाव

आईआईटी कानपुर के निदेशक अभय करंदीकर ने कहा कि नए नैनो तकनीक नैनो पार्टिकल्स से फसल की बीमारियों से बचाव होगा, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान होगा और फसल की पैदावार में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि हमारे संस्थान ने किसानों की मदद के लिए कई नए हाईटेक प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। हम कृषि की नई तकनीकों की खोज करके कृषि के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं.

फसलों की बेहतर उत्पादकता की दिशा में काम करेगा

आईआईटी कानपुर के निदेशक ने कहा कि खोजे गए मेटाबोलाइट का उपयोग फसल जनित बीमारियों को रोकने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए एक प्रभावी जैविक रोगाणुरोधी एजेंट और कार्बनयुक्त डिग्रेडेबल के रूप में किया जा सकता है. यह फसलों की बेहतर उत्पादकता पौध संरक्षण की दिशा में काम करेगा और प्रतिस्पर्धा के स्तर को पूरा करने में मदद करेगा.

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