कानपुर: कोरोना काल में 40 फिसदी बच्चे स्कूल छोड़ सकते हैं, वजह है फीस

Smart News Team, Last updated: 11/09/2020 03:18 PM IST
  • स्कूलों का एक संगठन के आंतरिक सर्वे के अनुसार कोरोना काल में फीस जमा ना करने पाने की वजह से 2020-21 सत्र के 40 प्रतिशत छात्र स्कूल छोड़ सकते हैं.
काल में फीस जमा ना करने पाने की वजह से 2020-21 सत्र के 40 प्रतिशत छात्र स्कूल छोड़ सकते हैं.

कानपुर. कानपुर में स्कूलों का एक संगठन के आंतरिक सर्वे की माने तो कोरोना काल में फीस जमा ना करने पाने की वजह से 2020-21 सत्र के 40 प्रतिशत छात्र स्कूल छोड़ सकते हैं. इस सर्वे के अनुसार इसमें भी उन छात्रों की संख्या ज्यादा है जिनके अभिभावक ना तो फीस जमा कर रहे ना ही स्कूल प्रबंधन से किसी तरह का संपर्क कर रहे. ऐसे ज्यादातर अभिभावक अनिर्णय की स्थिति में अपने मूल निवासी यानी अपने गांव चले गए हैं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इन स्कूलों के बच्चों के माता-पिता के फीस भर पाने की असमर्थता से बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ना तय है. 

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बता दें कि लॉकडाउन लगने के कुछ दिन बाद से स्कूल और अभिभावको में फीस को लेकर खिंचतान शुरू हो गई थी. जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ता गया तकरार भी बढ़ती गई. जुलाई आते-आते तो कई अभिभावक संगठन सड़कों पर उतरकर नो स्कूल, नो फीस की मांग करने लगे. अभिभावकों का तर्क है कि जब स्कूल ही नहीं चले तो फीस किस बात की. विशेषज्ञों का कहना है कि इस कोरोना काल में ना जाने कितने लोगों की नौकरी चली गई, बहुत से लोगों की सैलरी पहले के मुकाबले कम हो गई है, अक्सर लोगों के व्यवसाय भी घाटे में चल रहे हैं. ऐसे में इस मुश्किल वक्त में निजी स्कूलों की मोटी फीस भर पाना आसान नहीं है.

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बच्चो के स्कूल छोड़ने को लेकर दून इंटरनेशनस्कूल के संयुक्त सचिव अमरप्रीत सिंह कहते हैं कि मेरा मानना है कि ऐसे स्लूक जहां शुरू से अच्छी पढ़ाई हो रही है वहां ड्रॉपआउट कम होगा लेकिन जहां परिस्थितियां प्रतिकूल हैं वहां 40 फीसदी तक हो सकता है. छोटे क्लासों में ड्रॉपआउट अधिक लेकिन सीनियर में कम होगा. फीस का मुद्दा भी इसे तय करेगा. 

इस तरह तमाम विशेषज्ञ स्कूलों की फीस को लेकर अपना मत रख रहे हैं लेकिन एक बात पर सभी सहमत है कि इसका बुरा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ना तय है. उनमें भी खासकर उन बच्चों पर जिनकी पढ़ाई घर के आर्थिक स्थिति के कारण इस कोरोन काल में छूट गई है.

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