बिकरू कांड: विकास दुबे के असलहा लाइसेंस समेत 173 फाइलें कलेक्ट्रेट से गायब

Sumit Rajak, Last updated: Tue, 8th Feb 2022, 8:39 AM IST
  • कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में मारे गए हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे सहित 173 लोगों के असलहा लाइसेंस की फाइलें कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम से गायब हो गई हैं. इस वजह से वरिष्ठ सहायक (क्लर्क) को बर्खास्त कर दिया गया है.
फाइल फोटो

कानपुर. कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में मारे गए हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे सहित 173 लोगों के असलहा लाइसेंस की फाइलें कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम से गायब हो गई हैं. इस वजह से वरिष्ठ सहायक (क्लर्क) को बर्खास्त कर दिया गया है.बता दें कि कानपुर देहात के अलग जिला बनने के बाद कानपुर नगर में जोड़े गए थानों की असलहा लाइसेंस की 303 फाइलें आई थीं. इसके लिए तत्कालीन सहायक शस्त्र लिपिक और वर्तमान में बिल्हौर तहसील में तैनात वरिष्ठ सहायक विजय कुमार रावत फाइलें लेकर आए थे. 29 फरवरी 2008 को विजय ने फाइलें देहात से रिसीव की थीं. वही, इन फाइलों में विकास दुबे की बंदूक लाइसेंस की भी फाइल थी. उसका नंबर 160 था. बिकरू कांड के बाद जब विकास की असलहा लाइसेंस की फाइलें तलाशी गईं तो हड़़कंप मच गया. 

काफी खोजबीन के बाद 1 से 130 नंबर तक की असलहा लाइसेंस फाइलें तो मिल गईं पर 131 से 303 नंबर तक की फाइलों का अता-पता नहीं था. इसके बाद सएसीएम चतुर्थ  ने जांच की. उन्होंने 11 नवंबर 2021 को रिपोर्ट देकर विजय रावत को दोषी करार दिया. इसके बाद 1 दिसंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.लेकिन उसने खुद को बेकसूर बताया. इसके बाद तत्कालीन डीएम विशाख जी ने विजय को बर्खास्त कर दिया.

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13 अक्तूबर 2020 को फाइलें न मिलने पर विजय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई. लापरवाही  की वजह से प्रशासन ने उसके खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिक दर्ज कराई थी. विजय के खिलाफ दर्ज मामले की जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी गई थी, उसमें भी दोषी बताया गया.बता दें कि 2008 से कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम से 173 फाइलें गायब हैं, इस मामले को लेकर साढ़े 12 साल तक अफसर ने दबाए रखा.

प्रशासनिक अफसरों को असलहा फाइलों की याद बिकारू कांड होने के बाद आई. रिपोर्ट नहीं मिली तो बर्खास्त की गई. तत्कालीन अफसरों पर कोई कार्रवाई ही नहीं हुई. तत्कालीन शस्त्र लिपिक राकेश चंद्र शर्मा को भी छोड़ दिया गया.

हो रही एसआईटी जांच

बताया जा रहा कि कलेक्ट्रेट के असलहा विभाग से फर्जीवाड़े का पुराना नाता है. पूर्व डीएम आलोक तिवारी ने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा होने पर एसआईटी जांच की थी जांच के दौरान सैकड़ों फाइलें गायब मिली थी. फर्जी तरीके से कलेक्ट्रेट में 69 असलहा लाइसेंस भी बन चुके है. सभी को निरस्त किया जा चुका है जबकि,दो साल में असलहा फर्जीवाड़े के चक्कर में कलेक्ट्रेट के विनीत कुमार, कार्तिकेय यादव समेत तीन लिपिक बर्खास्त हो चुके हैं. एडीएम फाइनेंस दयानंद प्रसाद का कहना है कि बिकरू कांड के आरोपित समेत कई फाइलें गायब होने पर एसीएम चतुर्थ से जांच कराई गई थी. दोषी पाए जाने पर तत्कालीन शस्त्र लिपिक को बर्खास्त कर दिया गया. पूरी जानकारी शासन को भेज दी गई है. 

 

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