मजदूरों के नाम करोड़ों की कंपनियां, टैक्स चोरी के बड़े रैकेट का खुलासा

Nawab Ali, Last updated: Thu, 26th Aug 2021, 4:04 PM IST
  • कानपुर में टैक्स चोरी के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है. गरीब मजदूरों को मात्र पांच हजार रूपये देने पर उनके नाम करोड़ों की कंपनी बनाने का खुलासा हुआ है. मजदूरों के नाम पर कंपनी व फर्म बनाकर खूब टैक्स चोरी की जा रही है. पिछले छह महीनों में 16 ऐसे मामले सामने आये हैं.
प्रतीकात्मक फोटो

कानपुर. टैक्स माफिया सरकार को टैक्स न देने के नाम पर नए-नए तरीके अपना रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी की एक गरीब व्यक्ति जो 5 से 10  हजार रूपये महीने का कमाता है उसके नाम करोड़ों की कंपनी कैसे हो सकती है. लेकिन टैक्स माफिया गरीब मजदूरों को मात्र पांच हजार रूपये देकर उनके नाम करोड़ों की कंपनी बनाते हैं जिससे वो जीएसटी की चोरी कर सके. यानी की गरीब आदमी को करोड़पति बनाकर उसके नाम पर करोड़ों की जीएसटी चोरी का बड़ा खेल खेला जा रहा है. पिछले 6 महीनों में ऐसे 16 मामले सामने आये हैं .

टैक्स चोरी के खुलासे में सामने आया है की गरीब मजदूरों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और निवास प्रमाणपत्र के आधार पर बोगस फर्म खोलने का रैकेट चल रहा है. इतना ही नहीं उनके नाम पर आईटीआर भी भरवाया जा रहा है. जिसके बाद उनके नाम पर बोगस फर्म खोली जा रही है. इन फर्जी कंपनी के नाम पर करोड़ों की टैक्स चोरी का चूना सरकार को लगाया जात है. लेकिन जब ये कंपनियां आयकर विभाग के रडार पर आती हैं तो टैक्स माफिया बाख निकलते हैं और अंत गरीब व्यक्ति फंस जाता है. 

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एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 स्टेट जीएसटी पीके सिंह ने बताया है की टैक्स चोरी का धंदा एनजीओ, ट्रस्ट और धार्मिक संस्थानों के नाम पर भी किया जा रहा है. इन संस्थानों को धरा 80जी और धारा 12-ए के तहत रजिस्टर्ड कराया जाता है. जिसके बाद 12-ए में रजिस्टर्ड होने पर टैक्स में पूरी तरह से छूट मिल जाती है. इसके अंतर्गत एनजीओ, ट्रस्ट और सोसाइटी आती हैं. लेकिन धारा 80 जी के तहत रजिस्टर्ड संस्थाओं को 50 फीसदी टैक्स में छूट मिल जाती है. पीके सिंह का कहना है की ऐसी सात हजार संस्था हैं जो की टैक्स की चोरी में संलिप्त है. जिनसे आवश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. 

 

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