कानपुरः बिना केस 26 साल से चली आ रही हिस्ट्रीशीट, गोलमोल रिपोर्ट दे रही UP पुलिस

Sumit Rajak, Last updated: Mon, 15th Nov 2021, 9:26 AM IST
  • पुलिस के करनामे भी अलग हैं. बर्रा छह निवासी विनोद द्विवेदी उर्फ प्रमोद की 1995 में बगैर जांच पड़ताल हीस्ट्रशीट खोल दी गई.26 साल से हिस्ट्रीशीट विनोद का पीछा नहीं छोड़ रही है और वह मुक्ति पाने के लिए भागदौड़ कर रहे है. 2 फरवरी की रात 1984 में ककवन बारापुर के कनपटियापुर गांव के बाबूलाल की हत्या कर घर में लूटपाट हुई थी. हिस्ट्रीशीटर 26 साल से जांच कराने के लिए भटक रहा पीड़ित मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई थी.
प्रतीकात्मक फोटो

कानपुर. पुलिस के करनामे भी अलग हैं. बर्रा छह निवासी विनोद द्विवेदी उर्फ प्रमोद की 1995 में बगैर जांच पड़ताल हीस्ट्रशीट खोल दी गई. उस वक्त ककवन में रहते थे और जब बर्रा में रहने लगे तो हिस्ट्रीशट बर्रा थाने ट्रांसफर कर दी गई. 26 साल से हिस्ट्रीशीट विनोद का पीछा नहीं छोड़ रही है और वह मुक्ति पाने के लिए भागदौड़ कर रहे है.

मूलरुप  से ककवन एग्घरा निवासी फैक्टीकर्मी विनोद द्विवेदी उर्फ प्रमोद बर्रा छह में 1998 से पत्नी मधु और बेटे आदित्य द्विवेदी के साथ रहते हैं.विनोद ने बताया कि पिता गंगाराम गांव में साधन सहकारी समिति की प्रशासक थे. 2 फरवरी की रात 1984 में ककवन बारापुर के कनपटियापुर गांव के बाबूलाल की हत्या कर घर में लूटपाट हुई थी. गांव के कुछ लोग ने साजिशन विनोद द्विवेदी और उनके पिता गंगाराम, दो अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था. उस समय विनोद की आयु करीब 16 वर्ष थी. सीनाख्त परेड में उनकी पहचान नहीं हुई.

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कोर्ट से सभी आरोपित दोषमुक्त

 मार्च 1987 में पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में मुकदमे से विनोद का नाम हटा दिया. तीन अन्य आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. मई 1987 में कोर्ट के तीनों आरोपित को दोष मुक्त घोषित कर दिया था. 

1984 के मुकदमे के आधार पर 1995 में हिस्ट्रीशीटर

विनोद के मुताबिक ककवन पुलिस ने न ही कोर्ट का आदेश देखा और न ही केस से संबंधित दस्तावेज की जांच की. बस 1984 में के मुकदमे के आधार पर 1995 मैं हिस्ट्रीशीटर खोल दी. जब पुलिस बर्रा छह पहुंची तो मुकदमे की जानकारी हुई.

सीएम से भी शिकायत की

 2017 में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की उसके बाद उनके खिलाफ अप्रैल 2019 में बर्रा से शांतिभंग की कार्रवाई की गई. 50 हजार के ब्रांड पर एसीएम प्रथम की कोर्ट में जमानत कराई थी.

गोलमोल रिपोर्ट देते रहे अफसर

पोर्टल पर शिकायत के बाद तत्कालीन ककवन थाना अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि एग्घरा गांव को रसूलाबाद थाने में समायोजित हो गया है. गांव से संबंधित रजिस्टर 8 आदि थाना रसूलाबाद में भेज दिए गए. वांछित आख्या थाना स्तर से मिलना संभव नहीं है. वहीं सीओ रसूलाबाद में 2018 में अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच करने पर पता चला कि विनोद बर्रा छह में काफी समय से निवास कर रहा है. दो हजार के लगभग ककवन में एक हत्या के मामले में आवेदक और उसके पिता अभियुक्त बनाए गए थे. जानकारी ककवन से कराने की कृपा करें. बर्रा पुलिस ने अपनी जांच में बर्रा से वंचित न होना बताया.1995 में ककवन थाने की पुलिस ने जबरन बना दिया था. हिस्ट्रीशीटर 26 साल से जांच कराने के लिए भटक रहा पीड़ित मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई थी.

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