गंगा की अपवित्रता के लिए सरकारी तंत्र है जिम्मेदार: केएन गोविंदाचार्य

Smart News Team, Last updated: 13/09/2020 08:22 PM IST
  • केएन गोविंदाचार्य ने हिंदुस्तान से बात करते गंगा की अविरलता और निर्मलता पर सवाल करते हुए सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा किया. गोविंदाचार्य के अनुसार गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक एक्ट बनाए जाने की जरूरत है.
केएन गोविंदाचार्य

कानपुर. हिंदूवादी चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने गंगा की स्वच्छता को लेकर सरकारी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं. मंधना स्थित एक फार्महाउस में हिंदुस्तान से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा की अविरल ता और निर्मलता को बनाए रखने में सरकारी तंत्र में कहीं ना कहीं कमी है. इस वजह से अभी भी गांव से लेकर शहरों तक नाले गंगा में सीधे गिर रहे हैं. गोविंदाचार्य के अनुसार उन्होंने कानपुर के धार्मिक स्थल बिठूर में अपने प्रवास के दौरान कई नालों को गंगा में गिरते हुए देखा. जिसके बाद उन्हें काफी पीड़ा हुई.

आपको बता दें कि केएन गोविंदाचार्य 1 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देवप्रयाग से गंगासागर तक अध्ययन प्रवास पर चल रहे हैं. गोविंदाचार्य का कहना है कि यदि गंगा को अविरल बनाना है तो उसका निरंतर 70 फ़ीसदी प्रभाव होना चाहिए. लेकिन पानी छोड़ने पर तो इसका प्रवाह होता है लेकिन बाकी दिनों में इसका कोई प्रवाह नहीं होता. इसके अलावा गंगा में जा रहे नाले भी इसके प्रवाह को रोक रहे हैं.

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सरकारी तंत्र द्वारा आधी अधूरी तैयारियों के साथ गंगा की तस्वीर को पेश किया जा रहा है. लेकिन इस और अधिक काम करने की आवश्यकता है. इसके लिये सबसे पहले सरकारी मशीनरी की खामियों को दूर करना होगा तभी गंगा को उसका असली मुकाम हासिल होगा.

गोविंदाचार्य ने कहा कि उनका पूरा ध्यान भारतीय संस्कृति की ताकत प्रकृति और पर्यावरण सुरक्षा पर है. उन्होंने अपने अध्ययन के अनुभव और निष्कर्ष को आम जनमानस के साथ साझा करने की बात भी कही.

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गोविंदाचार्य ने यह भी कहा कि गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया जाना चाहिए. साथ ही इसकी अविरल था और निर्मलता को बनाए रखने के लिए एक एक्ट भी बनाए जाने की आवश्यकता है. इफ़ेक्ट की बनने के बाद नदी को प्रदूषित करने वालों पर कार्रवाई होगी तो सभी को अच्छे परिणाम दिखाई देंगे.

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