कानपुर में ऑनलाइन होती है चरस-गांजा की डील, 'बच्चा' गैंग के चार गिरफ्तार

Smart News Team, Last updated: 23/08/2020 07:48 PM IST
  • कानपुर के काकादेव कोचिंग मंडी इलाके में बड़ी मात्रा में चरस और गांजा की बिक्री हो रही है. क्षेत्र में बाहरी इलाकों से आने वाले बच्चों को तनाव दूर करने की दवा के नाम पर इसे बेचा जा रहा है. रविवार को पुलिस ने ड्रग माफिया बच्चा के चार गुर्गों को डेढ़ करोड़ की मादक राशि के साथ गिरफ्तार किया है.
कानपुर के काकादेव कोचिंग मंडी में बड़ी मात्रा में ड्रग्स का धंधा किया जा रहा है.

कानपुर. रविवार को कानपुर में एक ऐसे मामला सामने आया जिससे सभी के होश उड़ गए. दरअसल, कानपुर पुलिस ने ड्रग्स की डिलीवरी कराने वाले बच्चा गैंग के चार गुर्गों को ड़ेढ करोड़ के मादक पदार्थ के साथ पकड़ा है.बच्चा कानपुर में 'एकाग्र मन की दवा' के नाम से ड्रग की डिलीवरी कराता था.

ड्रग माफिया बच्चा उर्फ सुशील शर्मा चरस, गांजा और स्मैक की बिक्री के ऑनलाइन आर्डर लेता था, जिसकी डिलीवरी वह अपने गुर्गों के जरिए करवाता था. इन गुर्गों ने कोचिंग मंडी और क्षेत्र में स्थित ढाबों के आसपास की दुकानों में व्हाट्सएप नंबर दिए हुए थे. इसके अलावा ड्रग्स के आर्डर कोडवर्ड से लिए जाते थे. कोड वर्ड के लिए ‘एकांत मन की दवा’ या ऐसे ही कुछ और सांकेतिक शब्दावली का उपयोग किया जाता था.

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पुलिस ने बच्चा के करीब दो दर्जन अन्य साथियों का भी पता लगा लिया है जिनकी तलाश जारी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार कोचिंग मंडी की दुकानों पर कोडवर्ड में मादक पदार्थों की बिक्री होने की जानकारी लिखी होती थी. इसके अलावा वहां व्हाट्सएप नंबर और वेबसाइट का नाम भी लिखा होता था.

बाहर से आने वाले छात्रों को ड्रग्स को तनाव दूर करने का जरिया बना कर बता कर ग्राहक बनाया जाता था। पुलिस के अनुसार ड्रग्स को 50 से 100 रुपये की छोटी पुड़िया में बेचा जाता था.

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कानपुर शहर की काकादेव कोचिंग मंडी में आस-पास के इलाकों से ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी युवा इंजीनियरिंग समेत अन्य कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं और यहीं पर कमरा या हॉस्टल लेकर रहते हैं. इसलिए ड्रग माफियाओं के लिए यह इलाका सबसे लाभकारी माना जाता है. वे यहां आने वाले युवाओं को नशे की लत लगवाकर अपना व्यवसाय बढ़ाना शुरू कर देते हैं. इस इलाके से ही पूरे कानपुर में युवाओं को नशे की लत का सामान डिलीवर किया जा रहा था. इसके अलावा क्षेत्र की कुछ दुकानों से भी मादक पदार्थों की बिक्री दिन-रात हो रही है.

     पूछताछ में सामने आया कि सुशील नेपाल से चरस, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा से गांजा बेचने की खेप मंगवाता है. पकड़े गए एक गुर्गे ने बताया कि वह ख़ुद ही ट्रकों और ट्रेनों के जरिए कई बार चरस कानपुर ला चुका है.

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ड्रग रैकेट के 4 गुर्गों की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने साढे़ 27 किलो गांजा,3 किलो चरस,700 ग्राम स्मैक सहित भारी मात्रा में मादक सामग्री बरामद की है.इसी के साथ ड्रग्स रैकेट में काम आने वाले नौ मोबाइल फोन, स्कूटी, बाइक और करीब  11.15 लाख रुपए भी पुलिस ने बरामद किए हैं.

सीओ त्रिपुरारी पांडे ने बताया कि बच्चा के गिरफ्तार साथियों के मोबाइल नंबर से कई व्हाट्सएप्प नंबरों की जानकारी मिली है. ऋषभ और गोलू काकादेव में ऑनलाइन व्यापार का सिंडिकेट चलवा रहे थे. इसके साथ ही वे मादक पदार्थों की डिलीवरी के लिए किशोरों और महिलाओं का भी सहारा लेते थे.

 

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