मुहर्रम में पूरी नहीं हुई कानपुर बड़ी कर्बला जाने की ख्वाहिश, दूर से मांगी दुआएं

Smart News Team, Last updated: 28/08/2020 06:24 AM IST
  • कोरोना संक्रमण के दौर में इस बार कानपुर में नवीं मुहर्रम पर बड़ी कर्बला की तरफ जाने वाली सारी सड़के बंद कर दी गई थी. लेकिन महिलाएं किसी कर्बला के बाहर पहुंच गई और रो-रोकर फातेहाख्वॉनी की और दुआएं मांगी.
कोविड की वजह से कर्बला के बाहर दुआएं मांनगी महिलाएं.

कानपुर. नवीं मुहर्रम पर कोरोना काल के चलते बड़ी कर्बला नवाबगंज की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. हर साल लाखों की तादाद में अकीदतमंद यहां मन्नतें मानने और पूरी होने पर फातेहा पढ़ने जाते थे. नवीं मौहर्रम की रात लाखों पैकियों की गश्त निशान के साथ पूरी होती थी और निशान को यहीं ठंडा किया जाता था. दस मोहर्रम को यहां ताजिया दफ्नाए जाते हैं. गुरुवार को किसी तरह महिलाएं कर्बला के बाहर पहुंच गईं और रो-रोकर फातेहाख्वॉनी की और दुआएं मांगी.

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कोविड गाइड लाइन के अनुसार इस बार मोहर्रम में किसी भी तरह के सार्वजनिक आयोजन पर रोक है. इसके बावजूद कुछ तंजीमों का कहना था कि वह ताजिया दफ्नानें और रस्म पूरी करने जाएंगे. पैकियों के एक खलीफा ने भी हर हाल में यहां पहुंचने और निशान ठंडा करने का दावा किया था. इसके बाद यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई. बड़ी कर्बला के मुख्य मार्ग तक किसी न किसी तरह महिलाएं पहुंच गई और दिन भर यह सड़क पर ही बैठकर फातेहा पढ़ती रही और कर्बला के शहीदों की याद में आंखें नम करती रही. उधर, बड़ी कर्बला के मोहतमिम इम्तियाज हुसैन ने प्रशासन से सीमित लोगों के लिए बड़ी कर्बला खोलने की बुधवार को मांग भी की थी. ऑल इंडिया शिया युवा यूनिट के नायाब हुसैन ने कहा कि ताजियादारी घरों में हो रही है. इसे कर्बला में दफ्नाने की इजाजत दी जाए.

बड़ी कर्बला, नवाबगंज को जाने वाले सभी रास्ते सील कर दिए गए हैं.

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सातवीं मोहर्रम की शाम गुरुवार को इमाम हुसैन (अस) के भतीजे हजरत कासिम की मेहंदी का घरों में शोक भरे माहौल में एहतिमाम किया गया. वैसे तो इस मौके पर रात भर कासिम की मेहंदी के जुलूस निकलते थे लेकिन इस बार कोविड के चलते ऐसा नहीं हो सका. ग्वॉलटोली, पटकापुर और नई सड़क समेत कई इलाकों में कासिम की मेहंदी का खास इंतजाम किया गया. ऑल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने गद्दियाना में हुए जलसे को खिताब करते हुए कहा कि मुसलमान हर तरह की बुराइयों को त्याग कर इमाम हुसैन के गुलाम बन जाएं. शराब, जुआं से तौबा करें और इमाम के सच्चे गुलाम बन कर रहें. जलसे में इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, मोहम्मद जमील कादरी और मोहम्मद शकील आदि मौजूद थे.

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