प्रदूषण ने पहले सांस लेना मुश्किल किया, अब बढ़ाया डिप्रेशन, याददाश्त हुई कमजोर

Smart News Team, Last updated: Thu, 12th Nov 2020, 10:37 AM IST
  • कानपुर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में पहले से परेशानियों का सामाना करना पड़ रहा था. अब इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. लोग डिप्रेशन में चले जा रहे हैं. 
वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं.

कानपुर. कानपुर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है. लोग सांस से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे हैं. प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोग डिप्रेशन में जा रहे हैं. लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगी है. इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. मनोविज्ञान सेंटरों पर इस समस्या से पीड़ित लोगों की काउंसिलिंग की जा रही है. सेंटर पर लोगों को ऐसे उपाय बताए जा रहे हैं जिससे वे उबर सकें. 

साइकोलॉजिकल टेस्टिंग एण्ड काउंसिलिंग सेंटर (पीटीसीसी) के निदेशक और पूर्व मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एलके सिंह ने बताया कि साल में नवंबर का महिना लोगों को डिप्रेशन से जुड़ी परेशानी में लाता है. इसके कई वैज्ञानिक कारण बताए जा रहे हैं. पिछले कुछ सालों से इस महीने में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है. जिसके कारण रोज तीन से चार मामले डिप्रेशन के आते हैं जिनकी आंखों में जलन, गले में खराश जैसी परेशानियों हैं. इसका कारण प्रदूषण हो सकता है. 

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डॉ. एलके सिंह डिप्रेशन को लेकर कहते हैं कि नवंबर महीने में तापमान गिरता है, इस दौरान शरीर तत्काल अपने को बदल नहीं पाता है. ऐसे स्थिति में लोग डिप्रेशन में जाने लगते हैं. प्रदूषण के कारण दिमाग के हाइपोथैलेमस तक ऑक्सीजन उतनी नहीं पहुंच पाती है जितनी होनी चाहिए. इस वजह से लोगो में डिप्रेशन और बढ़ जाता है. 

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डॉ. एलके सिंह ने इसके इलाज के बारे में बताया कि ऐसे लोग की काउंसिलिंग करने के साथ योगा करने की भी सलाह दी जाती है. इससे लोगो के शरीर में चुस्ती- फुर्ती आती है. अगर कोई योग नहीं कर पाता है तो वह एक्सरसाइज कर सकता है. 

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