कानपुर : बिकरू में लोकतंत्र का उदय, पंचायत चुनाव के लिए सामने आने लगे चेहरे

Smart News Team, Last updated: Sat, 2nd Jan 2021, 12:09 PM IST
  • गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के बाद बिकरू गांव में पहला पंचायत चुनाव होने जा रहा है। गांव में अब प्रधानी का चुनाव लड़ने के लिए छह से ज्यादा उम्मीदवार सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि दशकों से विकास दुबे के परिवार रहने वाली प्रधानी अब दूसरे घरों तक पहुंचेगी। इसके गांव में पोस्टरवार भी शुरू हो चुका है।  
बिकरू गांव 

कानपुर : गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के बाद बिकरू में एक बार फिर लोकतंत्र लौट आया  है। दशकों से जिस पंचायत पर विकास दुबे के परिवार का कब्जा रहा है, अब वहां दूसरे परिवार भी चुनाव के लिए आगे आए हैं। पंचायत चुनाव के बहाने सालों बाद इस बार गांव में नववर्ष की शुभकामनाओं वाले पोस्टर-बैनर लगे। लोगों के लिए यह पोस्टरवार अजीब सा है, क्योंकि विकास के जिंदा रहते यह हिमाकत करने की जुर्रत किसी की नहीं थी।

बिकरू में बीते साल दो जुलाई की रात हुई आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की घटना को दो जनवरी को छह महीने पूरे हो जाएंगे। घटना के बाद ही विकास दुबे के आतंक का साम्राज्य भी तहस-नहस हो गया, जो उसने दहशत की नींव पर खड़ा किया था। इस बार एक जनवरी को बिकरू गांव में लोकतंत्र का सूर्योदय होते दिखा। गांव की दीवारों पर बड़ी संख्या में पोस्टर-बैनर लगे थे। लोगों ने नववर्ष व गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ पंचायत चुनाव में अपने दावेदारी ठोकी है।

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एक बुजुर्ग के मुताबिक गांव में विकास के रहते इस तरह की दावेदारी पर सख्ती के साथ रोक थी। वर्ष 1992 में विकास दुबे के अपराध जगत में कदम रखने के बाद वर्ष 1995 में हुए पंचायत चुनाव में गांव की प्रधानी दुबे परिवार में बंधक बनकर रह गई। इन 25 सालों में गांव में वही हुआ, जैसा विकास ने चाहा। पंचवर्षीय योजनाओं में दो बार ऐसा हुआ, जब कोई दुबे परिवार के अलावा कोई मैदान ही नहीं उतरा। पिछली बार जब वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव हुए तो विकास के भाई दीपू दुबे की पत्नी अंजली दुबे निर्विरोध प्रधान बनी, जबकि उसकी पत्नी ऋचा दुबे जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई। हालांकि दो बार अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग सीट होने पर दो प्रधान जीतीं लेकिन प्रधानी विकास दुबे की ही चलती थी।

इस बार छह से ज्यादा लोग लड़ेंगे चुनाव

एक उम्मीदवार ने बताया कि इस बार छह से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में होंगे। चूंकि अभी सीट का परिसीमन नहीं हुआ है, इसलिए लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। गांव में लगभग दो हजार वोटर हैं, जिसमें प्रमुख रूप से 250 यादव, 200 ब्राह्मण और 150 मुस्लिम वोटर हैं।

कब किसके पास रही प्रधानी

1995  में विकास दुबे, 2000 में गायत्री देवी (अनुसूचित जाति-जनजाति), 2005 अंजली दुबे (निर्विरोध), 2010 रजनी कुशवाहा (पिछड़ा वर्ग),  2015 अंजली दुबे (निर्विरोध)

 

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