विकास दुबे के खौफ की कहानी, 25 साल बाद बिकरू के लोगों ने चुना प्रधान, इनकी जीत

Smart News Team, Last updated: 02/05/2021 08:56 PM IST
  • विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद बिकरू गांव में 25 साल बाद लोगों ने अपनी मर्जी का चुनाव चुनाव, इसके पहले प्रधानी का फैसला निर्वाचन आयोग नहीं करता था, सिर्फ विकास दुबे के हिसाब से प्रधान तय होता था. 
विकास दुबे के खौफ की कहानी, 25 साल बाद बिकरू के लोगों ने चुना प्रधान, इनकी जीत (फाइल फ़ोटो)

कानपुर: गैंगस्‍टर विकास दुबे के गांव बिकरू में 25 साल बाद निष्पक्ष मतदान से प्रधान का चुनाव किया गया है. बिकरू गांव की आरक्षित सीट पर मधु ने अपनी विरोधी बिंदु कुमारी को 54 वोटों से हराकर जीत दर्ज की है. इससे पहले यहां विकास दुबे अपने चहेतों को लड़ाते थे, और उनका प्रत्याशी निर्विरोध जीतता था. मतलब प्रधान की घोषणा विकास दुबे ही कर देते थे. 

निर्विरोध चुनाव का एक कारण ये भी है की वहां सिर्फ विकास दुबे की मर्जी से सब होता था. चुनाव तो खानापूर्ति ही महज होते थे. साफ है कि विकास की मौजूदगी में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की जीत विकास दुबे के दम पर लगभग तय होती थी. यही नहीं, कई बार तो चुनाव असलहों के दम पर निर्विरोध ही जीता जाता था.

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1995 में विकास दुबे बने थे प्रधान

गैंगस्‍टर विकास दुबे 1995 में पहली बार अपने रुतबे की दम पर प्रधान बने थे. जिसके बाद बिकरू समेत आसपास के इलाकों में विकास और उनके साथियों की दहशत के साए में ही चुनाव होते थे. विरोध करने वाले प्रत्याशियों को धनबल के जरिए दबा दिया जाता था. 

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जबकि इस बार आरक्षित सीट पर 10 उम्मीदवारों ने बिना डरे पर्चा भरा है और अपनी अपनी जीत के लिए न सिर्फ जमकर प्रचार किया बल्कि गांव की गलियां और विकास के जमींदोज हुए मकान को भी प्रत्याशियों ने पोस्टर से पाट दिया था. डेढ़ हजार आबादी वाली इस पंचायत के लोग इस बार विकास दुबे की दहशत से आजादी के बाद अपने मनपंसद प्रत्‍याशी को ग्राम प्रधान चुना है.

 

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