बेटियों के लिए मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड आया आगे, कहा-मेहर की रकम महिलाओं का हक

Smart News Team, Last updated: Sun, 3rd Jan 2021, 12:22 PM IST
  • ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड महिलाओं के हक के लिए आगे आया. बोर्ड ने नए साल पर 'हक-ए-मेहर अदा कीजिए' अभियान शुरू किया है. बोर्ड ने कहा है कि शौहर अपनी बीवियों को मेहर जरूर अदा करें. यह महिलाओं का हक है. इसे उधार न करें और माफ कराने की नीयत न रखें.
प्रतीकात्मक तस्वीर

मोहम्मद असीम सिद्दीकी

कानपुर. ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड ने नए साल के मौके पर महिलाओं के अधिकार में एक बड़ा अभियान चलाया है. यह अभियान 'हक-ए-मेहर अदा कीजिए' है. इस अभियान को लेकर बोर्ड ने कहा है कि शौहर अपनी बीवियों को मेहर जरूर अदा करें. इसे उधार न करें. माफ कराने की नीयत न रखें. अगर दूल्हा इस पर नहीं मानता है तो बेटियां निकाह कुबूल करने से मना कर सकती हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड की तरफ से पहली बार मेहर की रकम को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. बोर्ड अपनी वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ा रहा है.

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बता दें कि मेहर वह रकम होती है जो निकाह के समय दूल्हा-दुल्हन दोनों पक्षों की रजामंदी से तय की जाती है. शौहर की तरफ से यह रकम बीवी को सोना, चांदी या कैश के रूप में देनी होती है. महिलाओं के लिए यह एक तरह की आर्थिक सुरक्षा होती है. इसका मकसद यह होता है कि अगर किसी सूरत में दोनों के बीच में तलाक हो जाए तो महिला के पास कुछ आर्थिक सुरक्षा रहे, जिससे उसे दर-दर न भटकना न पड़े. मेहर की रकम को लेकर सख्त चेतावनी के बाद भी मुस्लिम समाज में इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है.

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सुन्नी उलमा काउंसिल ने इसे लेकर सर्वे किया है. सर्वे के अनुसार 90-95 फीसदी लोग मेहर उधार या माफी कराने की मंशा रखते हैं. ऐसे में ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड की तरफ से मेहर को लेकर एक बड़ी पहल है.

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क्या है मेहर

मुस्लिम समाज में निकाह एक अनुबंध है, इसमें मेहर (किसी भी रूप में पत्नी को मिलने वाली निश्चित रकम) अनिवार्य है. मेहर दो प्रकार का होता है.

1. मेहर-ए-मोअज्जल

2. मेहर-ए-मुवज्जल

मेहर-ए-मोअज्जल में निकाह के बाद तुरंत धनराशि देनी होती है, नहीं देने पर लड़की विदाई से मना कर सकती है. वहीं मेहर-ए-मुवज्जल में पूर्व में तय शर्त के समय पर मेहर देना होता है, इसमें धनराशि अधिक तक की जाती है.

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