पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर वतन वापस लौटे शमसुद्दीन, जेल में मिले सैकड़ों जख्म

Smart News Team, Last updated: Wed, 4th Nov 2020, 4:03 PM IST
  • कानपुर के रहने वाले फहीमुद्दीन की पाकिस्तान से 28 साल बाद वतन वापसी हुई है. अच्छी जिंदगी की तलाश में पड़ोसी देश पाकिस्तान गए शमसुद्दीन को जेल में रहना पड़ा. पाकिस्तान की जेल में उन्हें सैकड़ों जख्म दिए गए हैं.
जेल

कानपुर: वाघा के रास्ते कानपुर के कंघी मोहाल निवासी शमसुद्दीन के साथ चार कैदी भारत वापस आए हैं. अच्छी जिंदगी की तलाश में पड़ोसी देश पाकिस्तान गए शमसुद्दीन को जेल में रहना पड़ा. अगर उन्हें जरा सा भी इसका अनुमान होता कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में वर्षों तक कैदी बनकर रहना पड़ेगा  तो वह अपने वतन से शायद ही वहां जाते. कानपुर में रहने वाले फहीमुद्दीन ने शमसुद्​दीन की दर्दभरी दास्तां बयां की तो सुनने वालों का भी दिल भर आया. शमसुद्​दीन की पाकिस्तान से 28 साल बाद वतन वापसी हुई है.

फहीम ने बताया कि पाकिस्तान जाते ही उनके बुरे दिन शुरू हो गए थे. वतन छूटने के साथ ही बीवी का साथ भी नहीं रहा. पाकिस्तानी नागरिकता मिलने के बाद भी उन्हें भारतीय जासूस बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया. पाकिस्तान की जेल में उन्हें सैकड़ों जख्म दिए गए हैं. वह परिवार वालों से झगड़ कर 1992 में पाकिस्तान गए थे. शमसुद्दीन पाकिस्तान जाने से पहले जूते के अपर बनाकर खुद, अपनी बीवी व बच्चों के साथ परिवार के सदस्यों की गुजर-बसर में सहायक थे. फहीम के मुताबिक, अपने देश व शहर से बेहतर कुछ नहीं है. भाई पाकिस्तान जाने के कारण ही जेल में यातनाएं झेलते रहे. 

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शमसुद्दीन पाकिस्तान गए, तब उनकी बीवी और बच्चे भी साथ में पड़ोसी मुल्क गए थे. परेशानियों के दिन शुरू होने पर बीवी दोनों बेटियों के साथ कानपुर लौट आईं. इसी बीच दोनों के बीच तलाक भी हो गया. वर्तमान में वह कहां हैं, ये शमसुद्दीन या उनके परिवार के किसी सदस्य को पता नहीं है. वह पाकिस्तान में बिताए खराब दिनों की जानकारी बेहतर ढंग से दे सकती हैं.

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