कानपुर विकास प्रधिकरण डीजल घोटाले में बडी कार्रवाई तीनों जूनियर इंजीनियर निलंबित

Smart News Team, Last updated: Wed, 18th Aug 2021, 9:06 AM IST
  • कानपुर विकास प्राधिकरण डीजल घोटाला मामले में लगभग छह माह बाद जाँच पुरी हुई. जांच में आरोपी जूनियर इंजीनियर रविंद्र प्रकाश, असत अली और कर्मेंद्र सिंह को दोषी पाया गया. आदेश मिलते ही केडीए अध्यक्ष अरविंद सिंह ने तीनों को निलंबित कर दिया.
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कानपुर: कानपुर विकास प्राधिकरण डीजल घोटाला मामले में लगभग छह माह बाद जांच पुरी हुई. सोमवार को तीनों को निलंबित किए जाने का आदेश कानपुर विकास उपाध्यक्ष (केडीए) अरविंद सिंह को मिला. इस जांच में आरोपी जूनियर इंजीनियर रविंद्र प्रकाश, असत अली और कर्मेंद्र सिंह को दोषी पाया गया. आदेश मिलते ही केडीए अध्यक्ष अरविंद सिंह ने तीनों को निलंबित कर दिया है. निलंबन कर तीनों को अलग - अलग कार्यालयों में भेज दिया गया है. फैसला आ जाने के बाद अब सबंधित तत्कालीन उच्चाधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही शुरू हो सकती है.

दरअसल कर्मचारी नेता बछाऊ सिंह ने कमिश्नर से केडीए में डीजल घोटालों के लेकर शिकायत की थी. शिकायत मिलने के बाद कमिश्नर ने जांच के आदेश दिया था. केडीए के पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने आरोपी के खिलाफ दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की अनुशंसा किया था. लेकिन जांच में होती देर के चलते बचाऊ सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करना पडा. जिसके बाद सोमवार को तीनों आरोपी के निलंबित करने का नोटिस केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह को मिला.

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क्या है केडीए डीजल घोटाला मामला

कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में डीजल घोटाला दिसंबर 2017 से दिसंबर 2019 के बीच हुआ था. इस दौरान मोती झील जैसे इलाके में केडीए के रिकार्ड के मुताबिक प्रतिदिन छह से सात घंटे बिजली गुल दिखाई गई थी. बिजली गुल होने के कारण केडीए को प्रतिदिन छह से सात घंटे जेनरेटर चलाना पड़ा. साथ हीं इतनी देर बिजली गुल रहने के बावजूद केडीए ने 11 जुलाई 2019 को एक करोड़ 52 लाख रुपये का बिजली बिल का भुगतान किया. 

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इस दौरान आरोपियों ने डीजल की खपत दिखाने के लिए टैक्सी का भी खूब इस्तेमाल किया. रिकार्ड बुक में ऐसे कई फर्जी गाड़ी के नंबर है जो उपयोग में नहीं थे ,लेकिन केडीए के कर्मचारी और अधिकारी ने कार्यालय संबंधित कार्य के लिए उसका उपयोग था. कानपुर विकास प्राधिकारण ने अगस्त 2017 से दिसंबर 2019 के बीच डीजल की आपूर्ति के नाम पर दो करोड़, 15 लाख 57 हजार रुपये का गबन किया था.

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