Chandra Grahan 2021: जानें, क्यों लगता है चंद्र ग्रहण, क्या है इसकी असल कहानी

Smart News Team, Last updated: Fri, 19th Nov 2021, 12:01 PM IST
  • चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है. पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोकती हैं, लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे कई कहानियां है.
जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है. इस दौरान चंद्रमा कुछ घंटों के लिए पृथ्वी की छाया में ढक जाता है

कानपुर.आज शुक्रवार 19 नवंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. माना जा रहा है कि यह कई सालों बाद सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण होगा. ये चंद्र ग्रहण दोपहर 12:48 से शुरू होगा और शाम 4:17 पर समाप्त होगा. चंद्र ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट और 24 सेकंड का होगा. वैसे देखा जाए तो चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है. जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है. इस दौरान चंद्रमा कुछ घंटों के लिए पृथ्वी की छाया में ढक जाता है, लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे एक कहानी भी काफी प्रचलित है. हिंदू धर्म का मानना है कि चंद्र ग्रहण को पाप ग्रह का प्रतीक समझा जाता है, जहां राहु-केतु चंद्रमा को बांधने का काम करते हैं.

आइए जानते हैं क्यों लगता है चंद्र ग्रहण

जानिए, क्या कहता है हिंदू धर्म

हिंदू धर्म के अनुसार माना जाता है कि एक बार समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश निकलता था. जिसे लेकर देवताओं और असुर के बीच में झगड़ा हो गया. तब विवाद का निपटारा करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धरा और असुरों से बचाकर देवताओं के पास अमृत पहुंचा दिया लेकिन राहु ने अमृतपान कर लिया था. चंद्रमा को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने भगवान विष्णु को इस बारे में बताया. क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से उसका सिर काट दिया. लेकिन अमृत पान के कारण राहु फिर से जीवित हो गया इस पर भगवान विष्णु ने उसके दो दुकड़े कर दिए ,ऊपर वाला भाग राहु कहलाया और नीचे वाला भाग केतु.

भगवान विष्णु ने दोनों को अलग-अलग दिशा में फेंक दिया, वो दिन पूर्णिमा का था. तब से माना जाता है कि राहु, चंद्रमा का दुश्मन है और तब से ही पूर्णिमा के दिन राहु-केतु चंद्रमा को घेर लेते हैं और उसकी रोशनी को रोक देते हैं. इस वजह से ग्रहण को अच्छा नहीं माना जाता है.

जानिए, क्या कहता है विज्ञान

वहीं वैज्ञानिक रूप में देखा जाए तो चाँद धरती के चक्कर लगाता है और धरती सूरज के. जब भी धरती सीधे तौर पर सूरज और चाँद के बीच में आ जाती है, तो वह चाँद पर पड़ रही रोशनी को रोक देती है. जिससे कि धरती की परछाई चाँद पर पड़ती है और यही चंद्र ग्रहण कहलाता है.

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