Ukraine Russia War: यूक्रेन पुलिस ने भारतीय छात्रों के मोबाइल तोड़े, ट्रेन का वसूल रहे सौ डॉलर, Video

Sumit Rajak, Last updated: Fri, 4th Mar 2022, 7:59 AM IST
  • भारतीय छात्र-छात्राओं से यूक्रेन पुलिस धक्का-मुक्की और अभद्रता से पेश आ रही है. पुलिस ने रोमानिया और हंगरी बॉर्डर की ओर जा रहे छात्रों को ट्रेन से उतारने की भी कोशिश किया है. वहीं वीडियो बनाते समय कई छात्रों का मोबाइल भी तोड़ डाला. यूक्रेन पुलिस लड़कियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. यूक्रेन के खारकीव में फंसे शहर के बच्चों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किया.
फाइल फोटो

कानपुर. भारतीय छात्र-छात्राओं से यूक्रेन पुलिस धक्का-मुक्की और अभद्रता से पेश आ रही है. पुलिस ने रोमानिया और हंगरी बॉर्डर की ओर जा रहे छात्रों को ट्रेन से उतारने की भी कोशिश किया है. वहीं वीडियो बनाते समय कई छात्रों का मोबाइल भी तोड़ डाला. यूक्रेन पुलिस लड़कियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. यूक्रेन के खारकीव में फंसे शहर के बच्चों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किया. ज्यादातर छात्रों ने खारकिव छोड़ चुके है. वे बमबारी के दौरान कई किमी पैदल यात्रा कर स्टेशन पहुंचे. साथ ही भीड़ में धक्का खाते हुए ट्रेन में सवार होकर बॉर्डर की ओर बढ़ रहे हैं. छात्राओं ने बताया कि भगवान सिर्फ एक ही प्रार्थना है कि किसी तरह वापस वतन लौट आएं.

बता दें कि खारकीव की स्थिति भयावह होती जा रही है. कर्फ्यू लगने के साथ गोली मारने का भी आदेश है. लगातार बिल्डिंग पर मिसाइल और बम गिरने से क्षतिग्रस्त हो रही हैं. वहीं नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में शहर के बच्चे पढ़ाई करते हैं. बताया जा रहा कि अब वे अपने रिस्क पर धीरे-धीरे बाहर निकलना शुरू हो गए हैं. लाल बंगला की रहने वाली प्रीति यादव ने कहा कि वह पैदल चलकर मंगलवार रात खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंचे थे. वहां से ट्रेन में बैठे और अब कीव पार गए हैं. जबकि हंगरी बार्डर तक पहुंचने में अभी भी एक से डेढ़ दिन का समय और लगेगा. प्रीति ने कहा कि यूक्रेन पुलिस लगातार भारतीयों के साथ अभद्रता कर रही है. ट्रेन में निशुल्क यात्रा होने के बावजूद भी हमने प्रति व्यक्ति 100 यूएस डॉलर दिए हैं. वे लड़कियों के साथ भी धक्कामुक्की कर रहे हैं. साथ ही वीडियो बनाने वालों के मोबाइल फेंक दिए हैं. 

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सूटरगंज की अक्षरा यादव ने कहा कि वह बुधवार सुबह 6 बजे रेलवे स्टेशन के लिए निकले थे. करीब 8 किमी पैदल चलने के बाद खारकीव स्टेशन से ट्रेन मिली है. उसका भाई आरव अभी भी स्टेशन पर ही है. शांतिनगर की विशाखा वर्मा ने कहा कि वह रेलवे स्टेशन पहुंच गई है लेकिन ट्रेन न होने से फंसी है. बस भगवान से प्रार्थना है कि जल्द ट्रेन मिल जाए और सुरक्षित बॉर्डर तक पहुंच जाएं. नेटवर्क ध्वस्त होने से परिवार का बच्चों से संपर्क भी टूट गया है. जाजमऊ के डॉ. नसीम ने कहा कि बेटी यास्मिन खारकीव से कीव पहुंच गई थी लेकिन इसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है.

 

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