UP के इस मंदिर में हर सुबह पूजा करता है महाभारत का ये महान योद्धा, ये है मान्यता

Smart News Team, Last updated: Mon, 26th Jul 2021, 5:06 PM IST
  • महाभारत को लेकर अनेक मान्यता है और इसी क्रम में एक यह भी मान्यता है कि महाभारत का सर्वश्रेष्ठ योद्धा और द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा अभी जिंदा हैं. इतना ही नहीं वह इस समय धरती पर भटकते हैं और कानपुर के एक मंदिर में पूजा भी करने आते हैं.
कानपुर खेरेश्वर मंदिर में रोज आते हैं अश्वस्थामा !

कानपुर. भारत देश मान्यताओं, धर्म और पूजा-अर्चना का काफी केंद्र रहा है. अब सावन लगते ही यहां पर हर सोमवार को शिव मंदिरों पर भक्तों की भीड़ लगेगी. हर शिव मंदिर की अलग-अलग मान्यता है और इसी क्रम में कानपुर का मंदिर खेरेश्वर है जिसका इतिहास द्वापरयुग से है. इस मंदिर को लेकर गांव वालों की मान्यता है कि इस मंदिर पर महाभारत काल के सर्वश्रेष्ठ योद्धा अश्वत्थामा पूजा करने आते हैं. गांव के लोगों का कहना है कि गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा गंगा किनारे रहते हैं और खेरेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं.

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि हर सुबह मंदिर में सफेद फूल मिलता है. उनका कहना कि कुछ लोगों ने एक विशालकाय छवि भी देखी है जिसने यह छवि सामने से देखी है वह बेहोश हो जाता है और फिर उस घटना के बारे में सब कुछ भूल जाता है. इस मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि इसी मंदिर में गुरु द्रोणाचार्य ने कारव और पांडवों को शिक्षा दीक्षा दी थी. इसी मंदिर पर कौरव और पांडवों ने शस्त्र विद्या ली थी.

अश्वत्थामा को भगवान कृष्ण ने श्राप दिया था कि वह घरती पर जब तक कष्ट भोगेगा जब तक महादेव उसके पापों से मुक्ति नहीं देते. इसलिए अश्वत्थामा हर रोज महादेव की पूजा करता है. गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को लेकर मान्यता कि वह अमर हैं. महाभारत की मान्यता के अनुसार अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों की छल से हत्या कर दी थी. अश्वत्थामा बहुत शक्तिशाली लेकिन कुंती पुत्र भीम ने अश्वत्थामा के माथे से मणि निकालकर उसे शक्तिहीन बना दिया था.

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