सिख दंगों में इंसाफ की उम्मीद जगी, 36 साल बाद SIT को बंद कमरे से मिले सबूत

Smart News Team, Last updated: Thu, 12th Aug 2021, 4:36 PM IST
  • उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सिख दंगों की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था. अब सिख दंगों के 36 साल बाद एसआईटी की टीम ने कानपुर से अहम सबूत जुटाए हैं. इन सबूतों के मिलने के बाद सिख दंगों में इंसाफ मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है.
सिख दंगों के 36 साल बाद SIT ने कानपुर के एक बंद मकान से जुटाए सबूत

कानपुर. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली के बाद सबसे अधिक सिख दंगे उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए थे. कानपुर में सिख विरोधी दंगों में 127 लोगों की हत्या हुई थी. इस हत्या की जांच के लिए योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था. जिसमें 36 साल बाद जांच में तेजी करते हुए SIT ने कानपुर के एक बंद मकान से बर्बरता के सबूत जुटाए हैं. इस मकान से फॉरेंसिक टीम के साथ गई एसआईटी ने मानव अवशेषों सहित कई सबूत इकट्ठा किए हैं. 

इसके साथ ही इस मकान से एसआईटी की टीम को कानपुर में हुई बर्बरता के निशान भी मिले हैं, इन सबूतों के मिलने के बाद सिख समुदाय को अब इंसाफ की उम्मीद जगी है. कानपुर के गोविंद नगर इलाके के इस घर में साल 1984 को कारोबारी तेज प्रताप सिंह (45) और बेटे सतपाल सिंह (22) की हत्या कर दी गई थी और इन बाप बेटों के शव जला दिए गए थे. इसके साथ ही कानपुर में साल 1984 के दंगों में 127 लोगों की हत्या हुई थी जिसमें कानपुर के गोविंद नगर, बर्रा, फजलगंज और अर्मापुर थाना क्षेत्रों में रहने वाले सिखों को सरेआम मारा गया था.

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने साल 2019 में एक एसआईटी का गठन किया था. इस मामले को लेकर एसआईटी ने 11 मामलों में जांच पूरी कर ली है और अब चार्जशीट दाखिल की जा रही है. इन दंगों को लेकर एसआईटी ने काफी जांच की है और वह ऐसी जगहों पर भी गई है जहां पहले कोई भी जांच दल नहीं पहुंच पाया है. वहीं सिख दंगों को लेकर एसआईटी की जांच को तेजी से देखते हुए सिख समुदाय के लिए न्याय की उम्मीद जगी है. 

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