कानपुर: आरटीआई के मामले में 17 हजार अफसरों पर जुर्माना, वसूली सिर्फ 800 से

Smart News Team, Last updated: Wed, 11th Aug 2021, 6:57 PM IST
  • आरटीआई कानून के तहत सूचना ना देने के मामले में उत्तर प्रदेश के 17000 अफसरों को दंडित किया गया था. साथ ही उनपर जुर्माना भी लगाया गया था. लेकिन, जुर्माने की वसूली सिर्फ 800 अफसरों से ही हो पाई है.
आरटीआई के मामले में 17 हजार अफसरों पर जुर्माना लगा था, वसूली सिर्फ 800 से ही हो पाई है.

कानपुर: आरटीआई कानून के तहत सूचना ना देने के कारण उत्तर प्रदेश के 17000 अफसरों को दंडित किया गया था. इन सभी अफसरों पर जुर्माना भी लगाया गया था. लेकिन, जुर्माने की वसूली सिर्फ 800 अफसरों से ही अब तक हो पाई है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि इन 17000 अफसरों में से 15000 अफसर रिटायर कर चुके हैं. नियम के तहत रिटायर कर चुके अफसर से वसूली नहीं की जा सकती है.

इस मामले पर राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने कहा कि जो मलाईदार विभाग हैं वहां सूचना देने में आनाकानी या अपारदर्शिता के मामले सबसे ज्यादा हैं. उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के तहत जो विभाग और अफसर लोगों को दिए गए जवाब में नीचे यह लिखकर दे रहे हैं कि इस सूचना को किसी कोर्ट या कहीं और साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वो अपराध कर रहे हैं. सूचना का मतलब ही साक्ष्य है. जो दफ्तर की फाइलों में सही मायने में बातें अंकित हैं वो साक्ष्य कोई भी ले सकता है. उन्होंने कहा कि अगर केडीए, नगर निगम या अन्य कोई विभाग सूचना के साथ यह लाइन अंकित कर रहे हैं कि इसे कोर्ट में नहीं लगाया जा सकता तो गलत कर रहे हैं.

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राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने कहा कि इस सूचना अधिनियम के तहत आज तमाम न्यायालयों में लोगों को बहुत राहत मिली है. बता दें कि राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह नगर निगम की लंबित मामलों की सुनवाई करने कानपुर आए थे. जहां उन्होंने तीन दिवसीय सुनवाई की और इस दौरान 106 में से 82 मामलों का निस्तारण किए.

 

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