31 दिसंबर को साल 2021 का आखिरी प्रदोष व्रत, इस विधि से करें शिव-पार्वती की पूजा

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 29th Dec 2021, 4:16 PM IST
  • साल 2021 का आखिरी प्रदोष व्रत की पूजा 31 दिसंबर को की जाएगी. इस दिन भोलेनाथ शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा करने का विधान है. कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति के जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.
31 दिसंबर को प्रदोष व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत की पूजा की जाती है. इस दिन विशेष रूप में माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा की जाती है. पूरे साल में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं. इस बार पौष मास की कृष्ण पक्ष की तिथि यानी 31 दिसंबर को प्रदोष व्रत पड़ रहा है. यानी साल का आखिरी प्रदोष व्रत साल की आखिरी तिथि को पड़ रहा है. इस बार प्रदोष व्रत की पूजा इसलिए भी खास है, क्योंकि आप पूजा में भगवान से नए साल की मंगलकामना कर सकते हैं.

प्रदोष व्रत को अलग अलग नामों से जाना जाता है. इस बार शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ रहा है. इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहेंगे. इस व्रतो विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए करती है. वहीं शुक्र प्रदोष व्रत यानी शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत काफी शुभ माना जाता है. आइये जानते हैं प्रदोष व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त.

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प्रदोष व्रत पूजा विधि- प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने. इस दिन सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. दीप जलाएं और हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. पूजा में सबसे पहले भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें और तिलक कर फूल चढ़ाएं. इसके बाद भगवान शिव को पंच फल, पंच मेवा और पंच मिष्ठान का भोग लगाएं. फिर प्रदोष व्रत कथा पढ़ें और उसके बाद भोलेनाथ की आरती कर उनका आशीर्वाद लें प्रदोष पूजा में भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है.

प्रदोष व्रत मुहूर्त

तिथि- 31 दिसंबर 2021, शुक्रवार

पौष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ- 31 दिसंबर 2021, सुबह 10:39 बजे से

पौष, कृष्ण त्रयोदशी समाप्त- 1 जनवरी 2022, सुबह 07:17 तक

प्रदोष काल- 31 दिसंबर 2021, शाम 05:35 से - रात 08:19 मिनट तक

साल 2022 के जनवरी महीने में कई त्योहार, मकर संक्रांति, वैकुंठ एकादशी से लेकर ये व्रत

 

 

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