Hartalika Teej Vrat 2021: ये है हरतालिका तीज व्रत कथा, और उसका महत्व

Anuradha Raj, Last updated: Sun, 5th Sep 2021, 8:00 PM IST
 9 सितंबर 2021 को इस बार हरतालिका तीज व्रत मनाया जाएगा. इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, और उनके लंबी आयु की कामना करती हैं. तो वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर के लिए तीज का व्रत रखती हैं. 
हरतालिका तीज 2021

महिलाएं सुखी और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं. ये व्रत बेहद ही कठिन होता है. इस व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, 24 घंटो तक, और शिव-पार्वती की विधि विधान से पूजा कर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज रखा जाता है. इस बार गुरूवार 9 सितंबर को हरतालिका तीज रखा जाएगा. मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए कुंवारी लड़कियां भी व्रत रखती हैं. इस दिन जो महिलाएं व्रत रखती हैं उन्हें व्रत कथा सुनना चाहिए. ऐसा करने से आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. 

ये है हरतालिका तीज व्रत कथा

पौराणिक कथाओं में ऐसा वर्णन किया गया है कि माता पार्वती के रूप में देवी सती ने पुन: शरीर धारण किया था और हिमायल राज की बेटी के रूप में जन्म लिया था. हिमालय राज को लगा कि अब उनकी पुत्री विवाह योग्य हो गईं है, तो उन्होंने निश्चय किया कि भगवान विष्णु से वो अपनी बेटी का विवाह करेंगे. लेकिन पूर्व जन्म के प्रभाव के कारण माता पार्वती मन ही मन भगवान शिव को ही अपना पति मानती थीं. हालांकि माता सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव तपस्या में लीन हो चुके थे, और वैरागी बन चुके थे.

पार्वती जी की सखियों ने माता पार्वती की मनेदशा देख और उनके पिता के निश्चय से उत्पन्न हुए असमंजस के कारण हरण कर लिया. इतना ही नहीं उनकी सखियों ने उन्हें हिमालय की कंदराओं में ले जाकर छुपा दिया.हिमालय की इन गुफा में भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था. माता पार्वती के कठोर परिश्रम का ही फल था जिससे भगवान शिव को वैराग्य तोड़ना पड़ा, और उन्होंने अर्धांगिनी के रूप में पार्वती को स्वीकार किया. सखियों द्वारा माता पार्वती का हरण करने के कारण ही इसे हरतालिका के नाम से जाना जाता है.

 

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