जूट से ऊन और पौधों से बनेगा धागा, यूपीटीटीआई और एनआईएनआईएफटी में करार

Smart News Team, Last updated: 11/02/2021 01:56 PM IST
  • कोलकाता का नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नॉलजी में जूट, लेनिन, ढेंचा, सिसल व रैमी समेत अन्य पौधों से प्राकृतिक फाइबर निकाला जाता है। यूपीटीटीआई के स्टूडेंट्स वहां से इसे सीख कर कपड़ा इंडस्ट्री नया आयाम देंगे।
जून से बनी ऊन

कानपुर : उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के स्टूडेंट्स अब प्राकृतिक फाइबर से धागा और जूट से ऊन बनाने के गुर सीखेंगे। इसके लिए संस्थान ने कोलकाता के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नॉलजी (एनआईएनआईएफटी) से करार किया है। ट्रेनिंग के लिए स्टूडेंट्स कोलकाता जाएंगे।

एनआईएनआईएफटी में जूट, लेनिन, ढेंचा, सिसल व रैमी समेत अन्य पौधों से फाइबर निकालने पर शोध कार्य होता है। जूट, ढेंचा व लेनिन के तना और रैमी की पत्ती से प्राकृतिक फाइबर मिलता है।  इससे तैयार धागों से बने कपड़े सर्दी में गर्मी और गर्मी में ठंडक का अहसास देते हैं। छात्र-छात्राएं इन प्राकृतिक फाइबर से धागा निकालने का हुनर सीखेंगे। जूट से पहले ज्यादातर बोरे बना करते थे, अब इससे ऐसे धागे निकाले जाते हैं, जो ऊन का काम करते हैं।

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इसी तरह लेनिन के फाइबर के धागे से बनने वाले कपड़े आरामदायक होते हैं, जबकि ढेंचा, सिसल व रैमी से निकलने वाले फाइबर का इस्तेमाल इंडस्ट्री में होता है। इससे रस्सियां बनाई जाती हैं। इस करार के तहत हाल ही में छह प्रोफेसरों को कोलकाता प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। अब बीटेक व एमटेक के छात्रों की टीम भेजने की योजना है। यूपीटीटीआई में टेक्सटाइल टेक्नॉलजी, टेक्सटाइल केमिस्ट्री, मैनमेड फाइबर टेक्नोलॉजी व टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं।

प्राकृतिक फाइबर होगा नया अनुभव : यूपीटीटीआई निदेशक प्रो. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बीटेक छात्रों के लिए जूट, लेनिन, ढेंचा, सिसल व रैमी से धागा निकालने की विधि सीखना बिल्कुल नया अनुभव होगा। इनसे धागा निकालने की मशीनें एनआइएनएफटी कोलकाता में हैं। अभी ज्यादातर अनुसंधान कृत्रिम फाइबर पर किया जा रहा था। अब प्राकृतिक फाइबर से ऐसे कपड़े तैयार किए जाने के बारे में छात्र सीख सकेंगे, जो समय की मांग है। यह कपड़े प्राकृतिक फाइबर से निकलने वाले धागे से बनाए जाते हैं। इस दिशा में देशभर में काम होना शुरू हो चुका है।

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