बेसिक शिक्षा में राज्य शिक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगी कानपुर की टीचर शशि मिश्रा

Smart News Team, Last updated: 03/09/2020 04:29 PM IST
  • कटरी सराय के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यपिका शशि मिश्रा को  राज्य सम्मान के लिए चुना गया है. ये सम्मान उन्हें स्कूल के लिए उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों को ध्यान में रखकर दिया जा रहा है. स्कूल की व्यवस्था और स्तर को देखकर ही हिन्दुस्तान ने इसे कटरी का कान्वेंट नाम दिया था.
राज्य सम्मान के लिए चुनी गईं कटरी शंकरपुर सराय के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की टीचर शशि मिश्रा

कानपुर: शहर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, कटरी शंकरपुर सराय (कटरी का कांवेंट) की प्रधानाध्यापिका शशि मिश्रा को राज्य पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है. बुधवार को जारी हुई सूची में उनका नाम शामिल है. हाल ही स्कूल महानिदेशक ने इस विद्यालय का निरीक्षण किया था और यहां की व्यवस्थाओं को देखकर बेहद खुशी जाहिर की थी. स्कूल को स्मार्ट क्लासरुम का तोहफा भी दिया था.

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. पवन कुमार तिवारी ने जानकारी दी है कि कानपुर नगर से इस बार 23 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने राज्य पुरस्कार के लिए आवेदन किया था. यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में आवेदन हुए थे. इसमें शशि मिश्रा के नाम पर मोहर लगी. विभाग में उनके चयन से खुशी का माहौल है.

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पुरस्कार के लिए चुनी गई शशि मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2008 में यहां केवल 9 छात्र और 8 छात्रएं थीं. इस साल यह संख्या 158 हो गई है जिसमें 87 छात्राएँ शामिल हैं. मल्लाह अधिसंख्य आबादी वाले इस कटरी में कभी किसी लड़की ने छठवीं में प्रवेश तक नहीं लिया था. आज यहां के पढ़े बच्चे परास्नातक तक कर चुके हैं. 17 ऐसी बेटियां हैं जिसे खुद के वेतन से उच्च शिक्षा दिलाई. चंडीगढ़ और बैंग्लौर जैसे शहरों में यहां के बच्चे नौकरी कर रहे हैं. अब कोई नशा नहीं करता और बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करते हैं. खुशी इसी बात को लेकर है कि जो समाज शिक्षा में सबसे पीछे था वह यहां सबसे आगे खड़ा है. पीपीएन डिग्री कॉलेज और ओंकारेश्वर जैसे इंटर कॉलेजों में यहां के बच्चे पढ़ रहे हैं. 

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शशि मिश्रा ने बताया कि स्कूल को एक ऐसे आदर्श के रूप में बनाया गया है तो जो अब एक मिसाल बन गया है. यह वह स्कूल है जहां देश-विदेश की टीमें अध्ययन के लिए आ चुकी हैं. उन्होंने कहा कि जो सम्मान हमें मिला है, वह वास्तव में स्कूल का सम्मान है और शिक्षा विभाग समेत सभी के प्रयास का परिणाम है. उन्होंने कहा कि इस स्कूल को सबसे पहले हिन्दुस्तान ने ही 'कटरी का कांवेंट' नाम दिया था जो इसकी पहचान बन चुका है.

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