'मल दान' से होगा बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज, दूसरे के 'पू' का होगा इस्तेमाल

Smart News Team, Last updated: Tue, 4th Jan 2022, 3:04 PM IST
  • नया दान इन दिनों ट्रेंड में आया है, उसे 'मलदान' यानी 'पू डोनेशन' कहते हैं. मलदान प्रक्रिया से बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज हुआ है. इस तरह के दान करने वाले लोगों को 'गुड पू डोनर्स' कहा जाता है क्योंकि यह बड़ी मुश्किल से मिलते हैं. यही नहीं कुछ लोग 'मलडोनर' बनकर अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं.
'मल दान' से होगा बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज, दूसरे के 'पू' का होगा इस्तेमाल

विज्ञान जगत में अभी तक आपने शरीर दान, अंग दान, रक्तदान, नेत्रदान के बारे में सुना होगा, लेकिन अब एक नए दान से बीमारी के इलाज ने सबको चौंका दिया है और यह है 'मलदान' यानी 'पू डोनेशन'. आपको सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा लेकिन इस मलदान प्रक्रिया से बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज हुआ है. इस तरह के दान करने वाले लोगों को 'गुड पू डोनर्स' कहा जाता है क्योंकि यह बड़ी मुश्किल से मिलते हैं. यही नहीं कुछ लोग 'मलडोनर' बनकर अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं.

इस प्रक्रिया के तहत गुणवत्ता वाले मल से आपकी आंतों की बीमारियों का इलाज होगा. इसके साथ ही डिजाइनर गट बैक्टीरिया बनाने के काम भी आएगा. लोगों को पेट संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलेगा.अच्छे मल के दान से बहुत से लोग फीकल ट्रांसप्लांट यानी मल प्रत्यारोपण करवा रहे हैं. इस नए ट्रेंड की वजह से इंसानी माइक्रोबायोम यानी आंतों के माइक्रोब्स पर नए अध्ययन हो पा रहे हैं. आंतों के माइक्रोब्स यानी आंतों के बैक्टीरिया में बदलाव करके इंसानों की सेहत को सुधारा जा रहा है.

कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है ठीक

मल चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि किसी स्वस्थ इंसान के उच्च गुणवत्ता वाले मल का प्रत्यारोपण दूसरे अस्वस्थ इंसान की आंतों और पेट में किया जाता है तो इससे कई प्रकार की बीमारियां ठीक हो सकती हैं. जैसे- क्लॉसट्रिड्रियम डिफिसिल कोलाइटिस या सी डिफ. क्योंकि इसकी वजह से ही डायरिया, सेप्सिस और मौत तक हो सकती है. लेकिन यदि सही तरीके से परीक्षित किया हुआ मल रोगी की आंतों में डाल दिया जाए तो वह कई तरह की बीमारियों से मुक्त हो सकता हैं. 'मल दान' का ट्रेंड देश दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है

 

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मल दान के लिए स्वस्थ लोगों की हो रही है खोज

एडिलेड स्थित बायोमबैंक के चीफ मेडिकल ऑफिसर सैम कोस्टेलो और चीफ एक्जीक्यूटिव थॉमस मिशेल ऐसे ही स्वस्थ लोगों को खोज रही है, जिनसे उच्च गुणवत्ता का मल हासिल किया जा सके. यानी लोग अपना मल दान करें. फिर इस मल को बायोमबैंक अपनी प्रयोगशाला में संवर्धित करके उसे प्रत्यारोपण के लायक बना देती है. ताकि जब किसी अस्वस्थ इंसान की आंतों में यह मल डाला जाए तो उसकी बीमारियां ठीक की जा सकें.

मल एकत्र करने के लिए बनाया गया शानदार टॉयलेट

इस काम के लिए बायोमबैंक में एक शानदार टॉयलेट बनाया गया है. लोगों का मल यहां से सीधे लैब की मशीन में जाता है. वहां उसके बेहतरी और अच्छे बैक्टीरिया को निकाला जाता है. उन्हें कंपनी अपनी सीक्रेट थैरेपी से और ज्यादा बेहतर बनाती है. इसके बाद अलग-अलग बीमारियों को ठीक करने के लिए मल और उसके बैक्टीरिया में रसायनों को मिलाया जाता है, जिससे बैक्टीरिया की ताकत बढ़ जाती है. फिर उसे अलग-अलग सीरिंज में भरकर रख दिया जाता है.

मल लेने से पहले होती ही पूरी जांच

डॉक्टरों के अनुसार किसी का भी मल लेने ले पहले उसकी पूरी तरह जांच की जाती है. यह जानकारी ली जाती है कि उसे किसी तरह का संक्रमण या बीमारी नहीं है, तब हम उसका मल लेते हैं. इस दौरान हम उसकी मेडिकल हिस्ट्री, ट्रैवल हिस्ट्री और एंटीबायोटिक हिस्ट्री की भी जांच करते हैं.

शरीर को सही बैक्टीरिया की जरूरत

 

सैम कोस्टेलो ने बताया कि हम जिस तरह से खा-पी रहे हैं, हमारे समय में माइक्रोबियल एक्सटिक्शंन हो रहा है. यानी माइक्रोब्स खत्म होते जा रहे हैं. अगर ये खत्म हो गए तो हमारा शरीर भी खत्म हो जाएगा. कई तरह की बीमारियां पैदा होंगी. इसलिए शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी है कि शरीर में सही बैक्टीरिया मौजूद रहे. इसलिए अगर किसी की बीमारियों को दूसरे के मल से ठीक किया जा सकता है तो उससे कोई दिक्कत नहीं है.

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