कानपुर: कहीं आपकी सेहत ना खराब कर दे मॉर्निंग वॉक, प्रदूषण पहुंचा खतरनाक स्तर पर

Smart News Team, Last updated: 26/10/2020 11:55 AM IST
  • अगर आप सुबह वह शाम के समय टहलने के आदी हैं तो पहले जानिए फिर सोचिए कहीं वाकिंग आपकी सेहत के लिए खतरा तो नहीं बनती जा रही है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े तो इसी ओर ही इशारा कर रहे हैं.
कानपुर में घटते तापमान के सतह बढ़ता प्रदूषण

कानपुर. सर्दी की दस्तक के चलते पिछले कुछ दिनों से लगातार गिर रहे तापमान के कारण कानपुर की आबो हवा खतरनाक स्तर तक पहुंचती जा रही है. तापमान के साथ बढ़ रहे प्रदूषण के कारण वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड दूषित गैसों का घनत्व वृद्धि के चलते महानगर में मॉर्निंग वॉक करने वाले लोगों में लगातार बीमारियों का खतरा पनपने लगा है.

गुरुवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में शहर की पार्शियल पार्टिकल और हानिकारक गैसों का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है. सामान्य दिनों में 260 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के मानक का पीएम 2.5 एवं pm10 की मात्रा महानगर के वायुमंडल में 23 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर यानी 283 ग्राम बढ़ी हुई पाई गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी स्कोर आम लोगों की सेहत के लिए खतरनाक बता रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर की आबोहवा में पीएम की मात्रा बढ़ने का प्रमुख कारण पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट को मान रहा है.

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वही कानपुर की गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से संबंध मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉक्टर सुधीर चौधरी का कहना है कि महानगर के वायुमंडल में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का घनत्व बढ़ने से लोगों की सेहत पर खासा प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि वायुमंडल में इन देशों की अधिक मात्रा से सबसे अधिक मॉर्निंग वॉक के समय इन गैसों का घनत्व सबसे अधिक होता है. इससे अस्थमा टीवी और फेफड़ों के रोगियों के अलावा हाल ही में कोरोनावायरस जैसी संक्रमण से उबरे रोगियों की सेहत के लिए सबसे अधिक खतरा है. 

वही सामान्य लोगों पर भी इन गैसों का प्रभाव पड़ना लाजिमी है. इससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ के अलावा हाफी आना, खांसी आने की समस्या हो सकती है. उन्होंने कहा कि इन जहरीली गैसों से बचने के लिए सड़कों पर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें साथ ही पार्शियल पार्टिकल से बचाव के लिए वाहन स्वामी वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग जरूर करें. इससे उनकी सेहत प्रदूषण का प्रभाव कम हो सकेगा. प्रोफेसर डॉक्टर चौधरी ने बताया कि प्रदूषण का ही कारण है कि इन दिनों हमारे चेस्ट अस्पताल में 10 से 12 परसेंट तक रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है.

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