Parivartini Ekadashi 2021: परिवर्तिनी एकादशी में होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार पूजा, जानें विधि और नियम

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 15th Sep 2021, 9:04 AM IST
  • परिवर्तनी एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस बार परिवर्तनी एकादशी का व्रत 17 सिंतबर शुक्रवार को रखा जाएगा. कई जगह परिवर्तनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी और पद्म एकादशी भी कहा जाता है.
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि और महत्व. फोटो साभार-हिन्दुस्तान

हिंदू कैलेंडर में हर माह दो एकादशी पड़ती है. पहली शुक्ल पक्ष एकादशी और दूसरी कृष्ण पक्ष एकादशी. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व होता है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को परिवर्तनी एकादशी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन योगनिद्रा से विष्णु भगवान करवट बदलते हैं, इसलिए स्थान परिवर्तन होने के कार इसे परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है. इसे जलझूलनी एकादशी और पद्म एकादशी भी कहा जाता है. इसलिए ये व्रत और भी खास हो जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

इस दिन होती है विष्णु देव के वामन अवतार की पूजा-  परिवर्तिनी एकादशी में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा अर्चना की जाती है. विष़्णु भगवान के कई अवतार है, वामन भी विष्णु के अवतर थे. कहा जाता है कि त्रेतायुग शुरू होने में भगवान विष्णु ने वामन रूप में देवी अदिति के गर्भ से जन्म लिया. वामन विष्णु के पहले ऐसे अवतार माने जाते हैं जो मानव रूप में प्रकट हुए यानी बालक रूपी ब्राह्मण अवतार.

Pitru Paksha 2021: पितृपक्ष में अगर नहीं लगाएं पंचबली का भोग, तो पितर भूखे ही लौट जाएंगे

परिवर्तनी एकादशी शुभ मुहूर्त- पुण्य काल- सुबह 06 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक। पूजा की कुल अवधि- 06 घंटे 08 मिनट तक रहेगी. इसके बाद 17 सितंबर को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक महापुण्य काल रहेगा. इसकी अवधि 02 घंटे 03 मिनट की है.

परिवर्तनी एकादशी पूजा विधि-दशमी तिथि के दिन परिवर्तनी एकादशी के व्रत का संकल्प लेकर व्रत शुरू किया जाता है.एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की अराधना करें. भगवान को पीला रंग प्रिय होता है, इसलिए पूजा में पीली वस्तुएं जैसे पीले रंग के फूल, फल और मिठाई का चढ़ाएं. खुद भी पीले रंग का वस्त्र पहने. पूजा सामग्री में गुड़, तिल और तुलसी को शामिल करना बिलकुल भी ना भूलें.इसके बाद अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूरे विधि-विधान के साथ व्रत का पारण करें.

Navratri 2021: शारदीय नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का करें पाठ, हर इच्छा होगी पूरी

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें