Rangbhari Ekadashi 2022: कब है रंगभरी एकादशी? जानें शिव-पार्वती की पूजा विधि और महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Wed, 2nd Mar 2022, 5:17 PM IST
  • Rangbhari Ekadashi 2022: होली पर्व से छह दिन पहले रंगभरी एकादशी होती है. कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती का गौना कराने के बाद शिवजी काशी लेकर पहुंचे थे. इसलिए इस दिन शिवजी और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. इस साल रंगभरी एकादशी 13 मार्च को पड़ रही है.
रंगभरी एकादशी (फोटो-लाइव हिन्दुस्तान)

Rangbhari Ekadashi 2022: वैसे तो हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है. लेकिन रंगभरी एकादशी धार्मिक दृष्टिकोण से खास मानी जाती है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती काशी पहुंचे थे. ये दिन होली से ठीक छह दिन पहले था. इसलिए इस रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस बार रंगभरी एकादशी 13 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन भक्त शिवजी और माता पार्वती का श्रृंगार कर विशेष पूजा अर्चना करते हैं और खुशी में रंग-गुलाल उड़ाते हैं.

रंगभरी एकादशी शुभ मुहूर्त-

रंगभरी एकादशी आरंभ- रविवार13 मार्च सुबह 10:21 से

रंगभरी एकादशी समाप्त- सोमवार 14 मार्च दोपहर 12:54 तक

सर्वार्थ सिद्धि योग- 13 मार्च सुबह 6:32 से रात्रि 10:08 तक

पुष्प नक्षत्र- 13 मार्च रात्रि 10:08 तक

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रंगभरी एकादशी पूजा विधि-

इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर साफ कपड़ें पहनें. घर के मंदिर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें. कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ विवाह कर काशी लौटे थे. इसलिए इस दिन माता गौरा का विशेष श्रृंगार किया जाता है. पूजा में सबसे पहले शिवलिंग पर कलश से जलाभिषेक करें फिर बेलपत्र चढ़ाएं. महादेव को गुलाल भी चढ़ाएं.

रंगभरी एकादशी महत्व -

कथाओं के अनुासार,रं गभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिवजी माता गौरा को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे. इसलिए इस दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का दूल्हे की तरह विशेष श्रृंगार किया जाता है. फिर बाबा विश्वनाथ जी के साथ माता गौरा का गौना कराया जाता है. इस खुशी में भक्त खूब रंग गुलाल उड़ाते हैं.

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