खान-पान का भाद्रपद महीने में रखें विशेष ध्यान, आसानी से पचने वाली चीजें ही खाएं

Smart News Team, Last updated: Mon, 23rd Aug 2021, 9:54 AM IST
  • भाद्रपद के महीने की आज यानी 23 अगस्त से शुरुआत हो चुकी है. साथ ही ये चतुर्मास का भी दूसरा महीना माना जाता है. इस महीने में पूजा-पाठ और दान धर्म का विशेष महत्व होता है. ऐसे में जितना हो सके दान करें, जाप करें, पूजा पाठ करें. साथ ही भाद्रपद महीने में खान-पान का भी विशेष प्रकार से ध्यान रखना चाहिए.
भाद्रपद महीने में खान-पान का रखना चाहिए विशेष ध्यान.

भाद्रपद को हिंदी पंचांग के अनुसार छठा और चातुर्मास का दूसरा महीना कहा कहा जाता है. चतुर्मास के अंदर चार महीने पड़ते हैं, जिसमें तप और ध्यान का बहुत ही महत्व होता है. इस महीने में अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए. चातुर्मास में जो लोग अनुशासन बना कर रखते हैं, उन्हें सिर्फ स्वास्थ्य लाभ ही नहीं मिलता है बल्कि धर्म लाभ भी मिलता है.

श्रीकृष्ण, बलराम और गणेश जी का इस महीने में कृष्ण पक्ष की पष्ठी को प्रकटउत्सव मनाया जाता है. दस दिवसीय गमेश उत्सव की शुरुआत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से हो जाती है. पूजा- पाठ और स्वास्स्थ्य के नजरिए से ये महीना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. इस महीने में उन चीजों को ना खाएं जिसे आप पचा ना पाएं. इस महीने में मैदे वाली, ज्यादा मसाले वाली और तेल वाली चीजों के सेवन से बचें.

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बारिश का अभी समय है, ऐसे में पूरी तरह से हम तक सूर्य की रौशनी नहीं पहुंच पाती है. यही कारण है कि पूरी शक्ति के साथ पाचन तंत्र काम नहीं करत है. इसलिए अपने खानपान में उन चीजों को शामिल करना चाहिए, जो आसानी से पच सके. स्वास्थ्य के लिए ये बहुत ही ज्यादा लाभदायक होता है. हो सके तो नियमित रूप से योगा करें. पूजा-पाठ में भी समय दें, और मंत्रों का जाप करें. अगर आप ऐसा करते हैं तो मानसिक रूप से शक्तिशाली हो जाएंगे.

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा का कहना है कि श्राद्ध पक्ष की शुरुआत इस महीने की पूर्णिमा से हो जाएगी. 20 सितंबर को इस बार पूर्णिमा पड़ेगा. भगवान विष्णु और उनके अवतारों की भादौ मास में विशेष प्रकार से पूजा करनी चाहिए. रोज सुबह स्नान आदि कर लें और अपने मंदिर में बाल गोपाल की पूजा करें. बाल गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख से श्रीगणेश की पूजा के बाद अभिषेक करना चाहिए. दूध में केसर मिलाकर बाल गोपाल को अर्पित करना चाहिए, उसके बाद जल से स्ना करवा दें. पीले चमकीले वस्त्र को बाल गोपाल को अर्पित करें. माखन-मिश्री का भगवान को भोग लगाएं. भोग में तुलसी दल रखना ना भूलें. साथ ही कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करना ना भूलें.

हर रोज जल्दी उठें, स्नान करके सूर्य को जल चढाएं. जल चढ़ाने के दौरान ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप जरूर करें. शिवलिंग पर भी गणेशजी और श्रीकृष्ण की पूजा के बाद जल चढ़ाएं. ऊं सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप करना ना भूलें. अपने सामर्थ्य के अनुसार धन और अनाज दान में दे. चाहें तो वस्त्रों का भी दान करें. दूर्वा की 21 गांठ गणेश जी को चढ़ाएं, लड्डू का भोग लगाते हुए श्रीगणेशाय नम: का जाप करें.

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