इस दिन है अजा एकादशी, जानें व्रत नियम, मुहूर्त और पूजा विधि

Anuradha Raj, Last updated: Fri, 27th Aug 2021, 9:28 AM IST
  • अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. ऐसे में विधि-विधान से व्रत रखें, और पूजा अर्चना करें. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा बरसती है. साथ ही अजा एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए.
अजा एकादशी व्रत 2021

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्षी को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार शुक्रवार यानी 3 सितंबर को एकादशी का व्रत है. भगवान विष्णु को एकादशी का व्रत समर्पित होता है. ऐसे में अगर विधि-विधान से भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तो वो बेहद ही फलदायक होता है. धार्मिक मान्यता ये भी है कि जो व्यक्ति एकादशी का व्रत रखता है उसके सारे पाप नाश हो जाते हैं. जो लोग इस व्रत को करते हैं, वो सभी सुखों को भोगता है और फिर विष्ण लोक में चला जाता है.

ये है अजा एकादशी का शुभ मुहूर्त

सुबह 6 बजकर 21 मिनट से 2 सितंबर को एकादशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी. जो 7 बजकर 44 मिनट 3 सितंबर को समाप्त हो जाएगी. 4 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा, जिसका शुभ मुहूर्त 5 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है.

ये है एकादशी व्रत की विधि

सुबह जल्दी उठ जाएं, और स्नान आदि कर लें. उसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं. गंगा जल से भगवान विष्णु का अभिषेक कर दें. पुष्प और तुलसी दल भगवान विष्मु को समर्पित करना ना भूलें. संभव हो तो इस दिन व्रत भी रख लें. उसके बाद आरती करें. भोग में सिर्फ सात्विक चीजों का ही प्रयोग करें. बता दें तुलसी दल के बिना कहा जाता है कि भगवान भोग ग्रहण नहीं करते हैं. भगवान विष्णु के संग इस पावन दिन पर मां लक्ष्मी की भी पूजा करें.  ज्यादा से ज्यादा भगवान का ध्यान रखें.

इन बातों का अजा एकादशी के दिन रखें ध्यान

शास्त्रों में ऐसा वर्णन किया गया है कि चावल एकादशी के दिन नहीं खाना ताहिए. जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है वो अगले जन्म में रेंगने वाले योनि में जन्म लेता है. इसलिए चालव अजा एकादशी के दिन भूलकर भी ना खाएं. श्रीहरि के प्रति एकादशी का व्रत समर्पण भाव को दर्शाता है. ऐसे में खान-पान और बर्ताव में एजा एकादशी के दिन संयम बरतना चाहिए. एकादशी की तिथि को सभी तिथियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. अगर आपको एकादशी का लाभ चाहिए तो लड़ाई झगड़े से बचें.

 

 

 

 

 

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