आरटीओ की लेटलतीफी का खामियाजा भुगतेंगे दस हजार से ज्यादा लोग, ड्राइविंग लाइसेंस के लिए दोबारा लगेगी फीस

Uttam Kumar, Last updated: Fri, 17th Sep 2021, 11:56 AM IST
  • कोरोना काल में कैंसिल हुए लर्निंग लाइसेंस की वैधता 30 सितंबर को खत्म हो रही है. ऐसे में जिन लोगों का स्थायी लाइसेंस नहीं बन पाया है, उन्हें फिर से नए सिरे से आवेदन करना होगा साथ ही फीस भी फिर से देना होगा. अभी आवेदन करने वालों को तीन महीने बाद स्लॉट मिल रहा है. ऐसे में तय समय के अंदर स्थायी लाइसेंस बन पाना संभव नहीं है. उचित समय पर स्लॉट नहीं मिलने के कारण करीब दस हजार लोगों को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के फिर से नए आवेदन करना होगा. साथ ही फीस भी चुकानी होगी.
ड्राइविंग लाइसेंस (प्रतिकात्मक फोटो)

लखनऊ. कोरोना काल में कैंसिल हुए लर्निंग लाइसेंसे की वैधता 30 सितंबर को खत्म हो रही है. ऐसे में जिन लोगों का स्थायी लाइसेंस नहीं बन पाया है, उन्हे फिर से नए सिरे से  आवेदन करना होगा साथ ही फीस भी फिर से देना होगा. अभी आवेदन करने वालों को तीन महीने बाद स्लाट मिल रहा है. ऐसे में तय समय के अंदर स्थायी लाइसेंस बन पाना संभव नहीं है. उचित समय पर स्लॉट नहीं मिलने के कारण करीब दस हजार लोगों को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के फिर से नए आवेदन करना होगा. साथ ही फीस भी चुकानी होगी. 

दरअसल कोरोना महामारी के समय किसी भी कार्यालय में शत प्रतिशत कर्मचारी के साथ काम करने की इजाजत नहीं होने के कारण स्लॉट को कम कर दिया गया था. आरटीओ ट्रांसपोर्टनगर में कोरोना काल से पहले प्रतिदिन 276 स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते थे. कोरोना काल में सीमित संख्या में कर्मचारी की उपलब्धता के कारण में इनकी संख्या घटकर 176 कर दी गई. लेकिन स्थिति में सुधार होने के बावजूद इसकी संख्या में इजाफा नहीं किया गया जिसके कारण अब ड्राइविंग लाइसेंसे बनाने के लिए तीन महीने बाद स्लॉट मिल रहा है.

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ड्राइविंग लाइसेंस के लिए तीन महीने की वेटिंग के कारण सबसे ज्यादा लर्निंग लाइसेंसे वाले परेशान हैं. क्योंकि छह माह में लर्निंग लाइसेंस की वैधता समाप्त हो जाती है. ऐसे में  ड्राइविंग  लाइसेंस के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा और पुन फीस भरनी होगी. बढ़ते आवेदन की संख्या के बावजूद नहीं बढ़ाने का खामियाजा करीब दस हजार आवेदकों को भुगतना पड़ेगा. तय समय में आवेदन करने के बावजूद समय पर स्लॉट नहीं मिलने के कारण ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लंबा इंतेजार भी करना पड़ेगा  साथ ही फीस भी फिर से चुकानी पड़ेगी. 

कुछ लोगों को मुश्किल से दो महीना बाद का स्लॉट मिल पाया है.  ऐसे में तय तिथि से पहले लर्निंग से स्थायी लाइसेंस बन पाना संभव नहीं है. यह स्थिति  पूरे प्रदेश के अलग - अलग विभागों  में बनी हुई है. कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बावजूद पहले से निर्धारित संख्या में स्लॉट  नहीं बहाल हो पाया है. लोगों को इससे काफी परेशानी हो रही है.  

 

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