कोरोना की मार: लखनऊ में रंगमंच का चमकता सितारा कबाड़ बेचने को मजबूर

Smart News Team, Last updated: Tue, 15th Jun 2021, 11:17 AM IST
  • लखनऊ में रंगकर्मी मो. इकबाल कोरोना की ऐसी मार झेल रहे हैं कि उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कबाड़ बेचना पड़ रहा है. कोरोना के चलते सभी तरह के नुक्कड़ नाटकों  पर रोक है.
कोरोना के चलते रंगकर्मियों की आर्थिक हालात बहुत खराब हो गई है.(फाइल फोटो)

लखनऊ. रंगमंच के जिस कलाकार की मंच पर एंट्री लेते ही प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था आज वह कलाकार कोरोना की ऐसी मार झेल रहा है कि वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कबाड़ बेचने को मजबूर है. कोरोना से उपजे हालातों ने शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी मो. इकबाल को कबाड़ी बेचने वाला बना दिया है. कोरोना काल से पहले वह अपनी जीविका अभिनय से मिलने वाले पैसों से चलाते थे, लेकिन कोरोना के चलते सरकारी, गैर सरकारी कार्यक्रम बंद होने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की चिंता सामने आई तो वह कबाड़ बेचने को मजबूर हो गए.

मडियांव निवासी मो. इकबाल 2001 से रंगमंच में काम कर रहे हैं. वह भारतेन्द्रु नाट्य अकादमी में कार्यशाला करने के बाद वहीं के रंगमण्डल से जुड़ गए. उन्होंने दर्जनों नाटकों में बेहतरीन अभिनय किया है. अभिजीत मंडल, ललित पोखरिया, चित्रामोहन जैसे दिग्गजों के निर्देशन में वह अभिनय कर चुके हैं. उनकी अभिनय क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि एकल अभिनय के माध्यम से उन्होंने एक ही समय पर 14 किरदारों को जिया है.

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मो. इकबाल ने बताया कि कोरोना काल में स्थितियां दिन-प्रतिदिन बिगड़ती चली गई. कोरोना से पहले सरकारी नुक्कड़ नाटकों से आमदनी हो जाती थी, लेकिन सरकारी नुक्कड़ नाटकों के साथ ही मंचन और कार्यशालाएं भी बंद हो गई. उन्होंने मजदूरी करने के लिए लेबर कार्ड बनवाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. जब सभी रास्ते बंद हो गए तब उन्हें अपनी बीवी और दो मासूम बच्चों का पेट पालने के लिए मजबूरी में कबाड़ बेचना शुरू करना पड़ा.

संस्कृति विभाग कलाकारों के लिए कई योजनाएं चलाता है, लेकिन उसका सही से प्रचार-प्रसार नहीं होने से कलाकारों को फायदा नहीं मिल पा रहा है. मो. इकबाल का कहना है कि उन्हें संस्कृति विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं है.

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