यूपी 2022 विधानसभा चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं ओवैसी और राजभर

Smart News Team, Last updated: Thu, 8th Jul 2021, 10:41 PM IST
उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव में इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. प्रदेश में साल 2022 के विधानसभा चुनावों में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इस चुनाव को लेकर ओवैसी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओम प्रकाश राजभर के साथ हाथ मिला लिया है.
यूपी 2022 विधानसभा चुनाव में ओवैसी और राजभर प्रदेश की राजनीति को बदलेंगे

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीती में साल 2022 के चुनाव में बहुत कुछ बदल सकता है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी और सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इस बार एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रहे है. दोनों पार्टी पूर्वांचल में अपनी पकड़ को मजबूत आसानी से कर सकती है. क्योंकि पूर्वांचल की दर्जनों सीटों पर इनका वोट बैंक पक्का है. दोनों पार्टियां अधिकतर पूर्वांचल के जिले बलिया, मऊ, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, बहराइच में काफी फेरबदल कर सकते हैं.

प्रदेश में जहां पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मुस्लिम वोट बैंक था वो अब ओवैसी के खाते में आ सकता है. इसके साथ राजभर अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर पिछड़ी-अति पिछड़ी जातियों को अपनी तरफ आकर्षित करेंगे. हकीकत तो चुनाव के बाद ही पता चलेगी लेकिन इनके साथ छोट-मोटे दल साथ देतें तो हैं तो योगी सरकार के लिए इन दोनों का गठबंधन खतरनाक साबित होते दिख रहा है.

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बलिया से बहराइच तक अगर जातियों पर नजर डालें तो पूर्वांचल के हिस्से में मुसलमानों के साथ राजभर, पाल, चौहान, प्रजापति, कुशवाहा, बियार, नाई और गोंड़ जातियां इस गठबंधन की असली ताकत दिख रही हैं. वहीं सब कुछ सही रहा तो इस बेल्ट से राजभर और ओवैसी का गठबंधन 40 से 45 फीसदी के बीच वोट ले जाएगा.

इधर हरदोई से गाजियाबाद तक अर्कवंशी, आरख, बंजारा, सैनी, शाक्य, कुशवाहा तथा मुसलमानों का बड़ा गठजोड़ इस मोर्चा का साथ दे सकता है. हालांकि इनमें कुछ जातियां सपा और बसपा की कट्टर समर्थक मानी जाती हैं.

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