लखनऊ के जाने-माने इतिहासकार पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीण का निधन

Smart News Team, Last updated: Mon, 12th Apr 2021, 4:59 PM IST
  • लखनऊ शहर और संस्कृति पर कई किताबें लिखने वाले इतिहासकार पद्मश्री डॉक्टर योगेश प्रवीण का सोमवार का निधन हो गया है. उनको 2020 में पद्मश्री से नवाजा गया था.
लखनऊ की पहचान कहे जाने वाले इतिहासकार योगेश प्रवीण का निधन हो गया.

लखनऊ. इतिहासकार पद्मश्री डॉक्टर योगेश प्रवीण का 82 साल की उम्र में सोमवार को लखनऊ में निधन हो गया है. योगेश प्रवीण की तबियत काफी दिनों से खराब थी. मिली जानकारी के मुताबिक, योगेश प्रवीण की तबीयत सोमवार को खराब लग रही थी. जिसके बाद उनके परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे. अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही उनका निधन हो गया.

इतिहासकार पद्मश्री डॉक्टर योगेश प्रवीण उनके भतीजे सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि वो पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी. कल से अचानक बुखार आ गया. आज बुखार बहुत तेज था. काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे. अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल पहुंचते ही डाॅक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया.

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लखनऊ की नजर कहे जाने वाले योगेश प्रवीण को 2020 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्मश्री से नवाजा गया था. योगेश प्रवीण ने लखनऊ के इतिहास और संस्कृति पर कई किताबें लिखी हैं. लखनऊ के बारे में वे कहा करते थे कि लखनऊ उनके लिए लक्ष्मण की नगरी भी है और नवाबों का शहर भी है.

 

लखनऊ. इतिहासकार पद्मश्री डॉक्टर योगेश प्रवीण का 82 साल की उम्र में सोमवार को लखनऊ में निधन हो गया है. योगेश प्रवीण की तबियत काफी दिन से खराब थी. मिली जानकारी के मुताबिक, योगेश प्रवीण की तबीयत सोमवार को खराब लग रही थी. जिसके बाद उनके परिजन को इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे. अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही उनका निधन हो गया.

इतिहासकार पद्मश्री डॉक्टर योगेश प्रवीण उनके भतीजे सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि वो पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी. कल से अचानक बुखार आ गया. आज बुखार बहुत तेज था. काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे. अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल पहुंचते ही डाॅक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया.

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लखनऊ की नजर कहे जाने वाले योगेश प्रवीण को 2020 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्मश्री से नवाजा गया था. योगेश प्रवीण ने लखनऊ के इतिहास और संस्कृति पर कई किताबें लिखी हैं. लखनऊ के बारे में वे कहा करते थे कि लखनऊ उनके लिए लक्ष्मण की नगरी भी है और नवाबों का शहर भी है.

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