अयोध्या बाबरी विध्वंस मामला: जानें 6 दिसंबर 1992 के दिन क्या हुआ था

Smart News Team, Last updated: Wed, 30th Sep 2020, 10:41 AM IST
  • बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने आज आरोपियों को सजा सुनाई हैं. अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 के दिन क्या हुआ था. जानें यहां.
अयोध्या बाबरी विध्वंस: जानें 6 दिसंबर 1992 के दिन क्या हुआ था

लखनऊ. अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 के दिन क्या हुआ था, जिसका फैसला आज सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाया है. उस दिन की हुई घटना की कसक आज भी ताजा है. घटना का अंदाजा शायद बहुतों को नहीं रहा होगा. लेकिन, वहां कुछ बड़ा होने वाले था. भीड़ के जोश और वहां के माहौल को देखकर कुछ ऐसा ही लग रहा था.

6 दिसंबर 1992 के दिन अयोध्या में लाखों की संख्या में भीड़ जुट गई थी. भीड़ पूरी जोश और जुनून से भरपूर थी. अयोध्या में पहुंचे कारसेवकों के मुख पर ‘जय श्रीराम’, ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’, ‘एक धक्का और दो... जैसे नारों से पूरी अयोध्या गूंज रही थी. उसी दौरान वहां पर कार सेवकों के साथ लोगों की बड़ी संख्या विवादित स्थल के अंदर चली गई. इसके बाद उन लोगों का ढांचे के गुंबदों पर कब्जा हो गया. भीड़ की हाथों में बल्लम, कुदाल, छैनी-हथौड़ा था, भीड़ ने उसी से ढांचे पर वार करके उसे ध्वस्त कर दिया. देखते ही देखते यह दिन वर्तमान से इतिहास बन गया. यह सारी घटना तब हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल पर किसी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगाई हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए एक ऑब्जर्वर को भी नियुक्त किया था.

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तत्कालीन यूपी के सीएम कल्याण सिंह ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि उसके आदेशों का पूरा पालन सरकार करेगी. लेकिन, कल्याण सिंह की सरकार सुप्रीम कोर्ट से किए वादे को निभा नहीं सकी. 6 दिसंबर 1992 की घटना की जांच के लिए ‘लिब्रहान आयोग’ का गठन किया गया. 

6 दिसंबर के दिन सुबह से ही लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार के उस जगह पर पहुंचे थे, जहां प्रतीकात्मक रूप से कार सेवा होनी थी. वहां उन लोगों ने तैयारियों का जायजा लिया. इसके बाद आडवाणी और जोशी ‘राम कथा कुंज’ के लिए वहां से चल दिए थे. उसी जगह से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर नेताओं के लिए मंच बनाया गया था. वहां पर उस वक्त की भाजपा की युवा नेता उमा भारती भी मौजूद थी.

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फैजाबाद के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक ने 6 दिसंबर के दिन सुबह करीब 11 बजे ‘बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि परिसर’ का दौरा किया था. मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को पूरा कार्यक्रम सामान्य कार सेवा लगा था. दोपहर के बाद अचानक एक कार सेवक गुंबद पर पहुंच गया. इसके बाद गुंबद पर भीड़ जुट गई. भीड़ पर भाजपा के बड़े नेताओं का भी नियंत्रण नहीं रहा. नेताओं की अपील भीड़ पर बेअसर साबित हो रही थी. देखते ही देखते भीड़ ने ढांचे पर वार करके उसे ध्वस्त कर दिया.  इस घटना के बाद केंद्र की नरसिंह राव सरकार ने यूपी की कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया. यह भी बताया जाता है कि कल्याण सिंह बर्खास्तगी से करीब तीन घंटे पहले ही इस्तीफा दे चुके थे. इसके बाद देश के कई राज्यों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई. 

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