CM योगी के फिर अब्बाजान कहने पर सियासत, विपक्ष बोला- लोकतंत्र को कलंकित करने वाली भाषा

Ankul Kaushik, Last updated: Mon, 13th Sep 2021, 4:33 PM IST
  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि गरीबों का राशन अब्बा जान कहने वाले हजम कर जाते थे. सीएम योगी की इस टिप्पणी पर सियासत शुरू हो गई है और विपक्ष ने कहा है कि यह लोकतंत्र को कलंकित करने वाली भाषा है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, फोटो क्रेडिट (यूपी बीजेपी ट्विटर)

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं. कुशीनगर में सीएम योगी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2017 से पहले गरीबों के राशन को अब्बा जान कहने वाले हजम कर जाते थे. इस बायन को लेकर सीएम योगी को विपक्ष घेरने में लगा हुआ. सीएम योगी के इस बयान की विपक्ष ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह असंसदीय भाषा है. सीएम योगी के इस बयान पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा- मेरा हमेशा से मानना रहा है कि बीजेपी की मंशा घोर सांप्रदायिकता और नफरत के अलावा किसी अन्य एजेंडे पर चुनाव लड़ने की नहीं है तथा उसका सारा जहर मुस्लिमों के प्रति होता है. यहां एक मुख्यमंत्री हैं जो दोबारा यह दावा कर चुनाव जीतना चाहते हैं कि मुस्लिमों ने हिंदुओं के हिस्से का पूरा राशन खा लिया.

इसके साथ ही समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने सीएम योगी के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें असंसदीय भाषा का उपयोग शोभा नहीं देता. यह दर्शाता है कि वह कम पढ़े-लिखे हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि जो पढ़े-लिखे हैं, वे उचित और सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं. संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को ऐसी भाषा के इस्तेमाल से बचना चाहिए और ऐसी भाषा का इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए भी दुखद है.

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इसके साथ ही कांग्रेस की उप्र इकाई के प्रवक्ता अशोक सिंह ने योगी की इस टिप्पणी पर कहा, उप्र के मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा वास्तव में लोकतंत्र को कलंकित करती है, और इसका उद्देश्य समाज को विभाजित करना है. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने लिखा- हमारी सरकार चाहती है एक समावेशी अफगानिस्तान. लेकिन अब्बा जान के बयान से योगी चाहते हैं एक समावेशी यूपी या बांटो और राज करो. इसके साथ ही टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर लिखा- जो अब्बा जान कहते थे, वो गरीबों का सारा राशन हजम कर गए. भारत में एक चुना हुआ सीएम धार्मिक भावनाएं भड़का रहा है, ये आईपीसी की धारा 153ए का सीधा उल्लंघन है. क्या कोई इसका संज्ञान लेगा? सुप्रीम कोर्ट और यूपी पुलिस.

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कुशीनगर में एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा था- अब्बाजान कहने वाले लोग राशन हजम कर जाते थे और कुशीनगर का राशन नेपाल व बांग्लादेश पहुंच जाता था. आज जो गरीबों का राशन निगलेगा जेल चला जाएगा. अब्बाजान कहने वाले गरीबों की नौकरी पर डकैती डाल देते थे. पूरा परिवार झोला लेकर वसूली के लिए निकल पड़ता था. मोदी जी ने 7 वर्षों में देश की तकदीर व तस्वीर बदल दी. सबको शौचालय, बिजली, घर और राशन दिया. कांग्रेस और अब्बाजान वालों के समय बिजली नहीं आती थी, क्योंकि उन्हें अंधेरा ज्यादा अच्छा लगता है.

इससे पहले भी सीएम योगी ने अब्बा जान शब्द का जिक्र किया था. जब सपा संरक्षक मुलायाम सिंह यादव ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी तो सीएम योगी ने विधान परिषद में कहा था कि वो कौन लोग थे जो कहते थे कि हम वैक्सीन नहीं लगवाएंगे. ये वहीं लोग है जब अब्बा जान टीका लगवा लेते हैं तो कहते हैं कि हम भी वैक्सीन लगवाएंगे.

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