निशांत गंज के हजारों वर्ग मीटर की जमीन पर 2 जजों की खंडपीठ ने दिया अलग-अलग फैसला

Smart News Team, Last updated: 28/08/2020 03:42 PM IST
  • निशांत गंज के हजारों वर्ग मीटर की जमीन पर दो जजों की बेंच ने अलग-अलग निर्णय सुनाया है. जिससे यह मामला मुख्य न्यायमूर्ति के पास पहुंच गया है. मुख्य न्यायमूर्ति अब इस फैसले को वह पीठ के समक्ष संदर्भित करेंगे.
निशांत गंज भूमि विवाद में लखनऊ हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने अलग-अलग फैसला दिया है.

 लखनऊ. लखनऊ बेंच के दो जजों की खंडपीठ ने निशांत गंज वार्ड के 75 हज़ार वर्ग मीटर की एक नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड किए जाने वाले विवाद मामले में अलग अलग फैसला सुनाया है. इसके बाद इस मामले को रजिस्टार, लखनऊ पीठ द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष रखने का निर्देश को दिया गया है. ताकि इस मामले को मुख्य न्यायमूर्ति वृहद पीठ को संदर्भित कर सकें. खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है.वहीं दूसरी तरफ दूसरे न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने याचिका को खारिज कर दिया. इसके अलावा उन्होंने याची पर हर्जाना भी लगा दिया.

आपको बता दें कि प्रयास बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दाखिल याचिका पर यह खंड सुनवाई कर रही थी. न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल ने सुनवाई के बाद अपने निर्णय में याचिका को स्वीकार कर लिया और याची के पक्ष में लीज होल्ड राइट को फ्री होल्ड राइट में बदलने का आदेश दिया. इसके लिए उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य प्रतिभागियों को 30 दिनों का समय दिया.

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 लेकिन दूसरी तरफ न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए अलग फैसला दिया. न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने इस आदेश में न केवल याची की याचिका को खारिज कर दिया बल्कि याची पर 10 लाख का हर्जाना भी लगा दिया. इसके बाद मामले को वृहद पीठ के समक्ष पेश ने के लिए पूरी फाइल को मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया.

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दरअसल, ये पूरा मामला निशांत गंज वार्ड के मोहल्ला बाबा का पुरवा की 75 हज़ार वर्ग मीटर की नजूल जमीन से जुड़ा हुआ है. 40 के दशक के दौरान अपर इंडिया कूपर पेपर मिल्स कंपनी लिमिटेड को लगभग एक लाख 11 हज़ार 482 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा 30 साल के पट्टे पर दिया गया. इस पट्टे का दो बार नवीनीकरण भी किया जा चुका है. बाद में अपर इंडिया ने एक रजिस्टर्ड डीड करते हुए याची कंपनी को 75 हज़ार वर्ग मीटर की जमीन पर कब्जा दे दिया. गौरतलब है कि इस जमीन के फ्रीहोल्ड किए जाने का विवाद पहले भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आ चुका है.

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