UP Election 2022 के लिए भगवान की शरण में पहुंची BJP, AAP, कांग्रेस और BSP

Nawab Ali, Last updated: Mon, 8th Nov 2021, 8:38 AM IST
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ही तमाम राजनीतिक पार्टियां सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल पड़ी हैं. भाजपा का साफ संदेश है कि यूपी में राममंदिर और हिंदुत्व का एजेंडा रहेगा, इसी की तर्ज पर बाकि अन्य पार्टियों ने भी मंदिर दर्शन का आस्था का सहारा लेना शुरू कर दिया है. 
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां भगवान की शरण में. फाइल फोटो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को साधने के लिए हर सियासी दल आस्था के जरिये वोट पाने की जुगत में लग गए हैं. भाजपा शुरुआत से ही अपने को हिंदुत्व का रहनुमा मानती आई है. लेकिन भाजपा की हिंदुत्व वाली राजनीति के कारण अब बाकी सियासी दल भी सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी की गतिविधियों में बदलाव आया है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही अयोध्या में हर साल योगी आदित्यनाथ सरकार करोड़ों खर्च कर धूम-धाम से दीपोत्सव मनाती है. 

देश में भाजपा ने हिंदुत्व के डंके को बजाकर ही कई राज्यों समेत केंद्र में भी दूसरी बार वापसी की है. भाजपा हमेशा से ही अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर कायम रही और इस एजेंडे ने भाजपा को उत्तर प्रदेश में भी सालों के वनवास को खत्म कर रिकॉर्डतोड़ जीत दिलाई. अपने आप को सेक्युलर कहना वाली तमाम पार्टियां अब भाजपा की के पद चिन्हों पर चलने की कोशिश कर रही हैं. हाल ही का उदाहरण दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा अयोध्या में रामलला के दर्शन का देख सकते हैं. कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी भी लगातार मंदिर के दर्शन की राजनीति कर रही हैं. 

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव राममंदिर को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए देखे साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि सत्ता में आने पर भाजपा से अच्छा राममंदिर समाजवादी पार्टी बनवाएगी. राजनीतिक विश्लेषक आईजी अरुण कुमार का कहना है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके एजेंडे में से न तो राममंदिर और न ही हिंदुत्व गायब हुआ है.  

 

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