सरकार के फैसले के खिलाफ फिर खड़े हुए वरुण गांधी, बैंक निजीकरण को लेकर किया ट्वीट

Atul Gupta, Last updated: Fri, 17th Dec 2021, 5:24 PM IST
  • पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बैंकों के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए.
पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी (फाइल फोटो)

लखनऊ: एमएसपी से लेकर महंगाई तक अपनी सरकार को घेरने वाले पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने बैंकों के निजिकरण को लेकर सवाल उठाए हैं. वरुण गांधी ने ट्वीट कर बैंकों के निजीकरण का विरोध करते हुए लिखा कि अब जबकि हम पब्लिक सेक्टर के बैंकों को प्राइवेट करने की दिश में आगे बढ़ रहे हैं, हमें थोड़ी देर ठहरकर सोचना चाहिए कि इन बैंकों में करीब दस लाख लोग काम करते हैं. ये बैंक स्वंम सहायता समूहों को फंड मुहैया करवाते हैं, ग्रामीण बैंकिंग करते हैं और छोटे और लघु उद्योगों को लोन देते हैं. ये सब चीजें शायद प्राइवेट बैंक ना करें. इससे पहले एक और ट्वीट में वरुण गांधी ने लिखा 'एनपीए वसूली में केवल बैंको की विफलता को आधार मानकर, बैंको के निजीकरण के प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है. मेरी वित्त मंत्री जी से मार्मिक अपील है कि इससे प्रभावित सभी वर्गों से समग्र वार्ता करने के पश्चात ही बैंकिंग कानून (संसोधन) अधिनियम 2021 पर विचार किया जाए.'

गौरतलब है कि पिछले दिनों वरुण गांधी ने बढ़ती महंगाई को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि इससे किसानों के हाथ में पूरा पैसा आएगा. उन्होंने कहा कि वस्तुओं के असीमित भंडारण से थोक वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं जिससे खुदरा वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि बेतहाशा महंगाई की वजह से व्यक्ति के पास बहुत सीमित विकल्प बचे हैं इसलिए सरकार को तुरंत बड़े फैसले लेने चाहिए.

गौरतलब है कि देश के बसे बड़े बैंक कर्मचारी संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने दो दिनों की राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया है क्योंकि सरकार ने ऐलान किया है कि वो आईडीबीआई बैंक के अलावा दो और सरकारी बैंकों का निजीकरण करने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि इसी साल दो सरकारी बैंकों के अलावा एक जनरल इंशोरेंस कंपनी का निजीकरण किया जाएगा. चर्चा है कि सरकार चार सरकारी बैंकों जिनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को बेचने की तैयारी कर रही है यानी आने वाले दिनों में ये चार बैंक प्राइवेट हाथों में होंगे.

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