22 नवंबर को किसान महापंचायत, राकेश टिकैत बोले- कृषि कानून के बाद भी कई मुद्दे बाकी

Somya Sri, Last updated: Sun, 21st Nov 2021, 11:56 AM IST
  • लखनऊ में 22 नवंबर को किसान महापंचायत है जिसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत शामिल होंगे. राकेश टिकैत ने कहा कि तीनों कृषि कानून की वापसी की घोषणा की गई है. लेकिन इसके अलावा भी अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दे बाकी हैं. किसान नेता ने कहा कि किसानों पर दर्ज मुकदमे, उनकी मौत, एमएसपी सहित कई मुद्दे अभी बाकी हैं.
किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो)

लखनऊ: भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 22 नवंबर को वे लखनऊ जा रहे हैं क्योंकि इस दिन लखनऊ में महापंचायत आयोजित की जाएगी. राकेश टिकैत ने कहा कि तीनों कृषि कानून की वापसी की घोषणा की गई है. लेकिन इसके अलावा भी अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दे बाकी है. किसान नेता ने कहा कि किसानों पर दर्ज मुकदमे, उनकी मौत, एमएसपी सहित कई मुद्दे अभी बाकी है. 22 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत आयोजित होगी. जिसमें किसान नेता शामिल होंगे.

किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से मुखातिब होते हुए गाजीपुर बॉर्डर पर से कहा, "मैं लखनऊ जा रहा हूं, 22 तारीख को लखनऊ में महापंचायत है. कृषि क़ानून वापस हुए है. हमारे सारे मुद्दों में से केवल एक मुद्दा कम हुआ है, बाकी मुद्दे अभी बाकी है. किसानों पर दर्ज़ मुकदमें और जिन किसानों की मृत्यु हुई ये मुद्दे महत्वपूर्ण है."

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न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होना बाकी है

किसान नेताओं ने कहा कि, अभी सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग मानी है. इससे किसान नुकसान से बच गए. खेती-किसानी को बचाने के लिए सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होना जरूरी है. सरकार को यह कानून बनाना होगा कि कहीं भी किसान की फसल समर्थन मूल्य से कम कीमत पर नहीं खरीदी जाएगी. उन्होंने कहा कि आंदोलन में यह प्रमुख मांग रही है.

नहीं होगा किसानों का आंदोलन रद्द- राकेश टिकैत

गुरु पूर्णिमा पर राकेश टिकैत ने एलान किया था कि किसानों का आंदोलन तबतक रद्द नहीं होगा जबतक सरकार संसद में कानून रद्द नहीं करती. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से एमएसपी के साथ साथ दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे. राकेश टिकैत ने कहा कि 29 तारीख को संसद के शीतकालीन सत्र में जबतक कानून वापसी का प्रस्ताव पटल पर नहीं रखा जाता तबतक किसान कहीं जाने वाला नहीं है. वहीं किसान यूनियन के दूसरे नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि गुरुपर्व पर कृषि कानूनों को वापस लेने का सरकार का फैसला अच्छा कदम है. सभी किसान संघ साथ बैठेंगे और आगे की रणनीति पर बात करेंगे.

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