यूपी चुनाव 2022: स्वयंसेवी संस्था और दिव्यांगों को साधने में जुटी BSP, नवंबर में बड़ी बैठक की उम्मीद

Haimendra Singh, Last updated: Sun, 7th Nov 2021, 10:49 AM IST
  • विधानसभा चुनाव से पहले बसपा अध्यक्ष मायावती स्वयंसेवी संस्था और दिव्यांगों को रिझाने के लिए नवंबर के अंत में अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर सकती है. इस कार्य की जिम्मेदारी बसपा राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को दी गई है.
बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती.(फाइल फोटो )

लखनऊ. यूपी में विधानसभा चुनाव 2022(UP Assembly Election 2022) की तैयारियां जोरों पर चल रही है. सभी राजनीतिक पार्टियां मिशन 2022 को देखते हुए राज्य के वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने में जुट गए हैं. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां मौ. अली जिन्ना के सहारे 2022 में फिर से सत्ता में लौटने का सपने देख रहे हैं, तो वहीं बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती(Mayawati) को चुनाव से ठीक पहले दिव्यांगों की याद आई है. मिल रही जानकारी के अनुसार, मायावती 21 या 24 नवंबर को स्वयं सेवी संस्थाएं और दिव्यांगों के साथ बैठक कर सकती है. इस बैठक में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं.

मिशन 2022 को सफल बनाने के लिए स्वयं सेवी संस्थाएं की भूमिकाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सभी राजनीतिक पार्टियां यह भली-भांति जानती है कि स्वयं सेवी संस्थाएं के पास अच्छा खासा नेटवर्क है और काफी संख्या में लोग उनसे जुड़े हुए है, यदि ऐसी संस्थाएं किसी भी पार्टी के समर्थन में आ जाए, तो इस चुनाव में उनकी पार्टी को अच्छा वोट बैंक प्राप्त हो सकता है. राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात का अंदेशा भी लगा रहे हैं कि अपनी बैठक के दौरान बसपा समाज सेवी संस्थाएं एवं दिव्यांगों के लिए बड़ी घोषणाओं का ऐलान कर सकती है.

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बसपा नेताओं को स्वय सेवी सस्थाओं से समर्थन मिलने की उम्मीद

विधानसभा चुनाव को देखते हुए बसपा नेता कहना है कि अभी तक किसी भी पार्टी ने कुछ करने की घोषणा नहीं की है. बसपा चाहती है कि यूपी में स्वयं सेवी संस्थाओं को अपने साथ जोड़ने का काम किया जाए. बसपा ने इस कार्य पर पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को लगाया है. पार्टी के नेताओं का कहना है कि यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की स्थापना कराई थी. इसमें काफी संख्या में दिव्यांगों को शिक्षा-दीक्षा दी जा रही है.

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