बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: 30 सितंबर को फैसला सुनाएगी CBI की विशेष अदालत

Smart News Team, Last updated: 16/09/2020 03:25 PM IST
  • दशकों से चलते आ रहे बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत 30 सितंबर को फैसला सुनाएगी. इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत कई आरोपी हैं. 
 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और अन्य नेता आरोपी हैं.

लखनऊ. दशकों पुराने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अंतिम फैसला 30 सितंबर को होने की संभावना है. पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या टाइटल सूट विवाद में राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था और राम मंदिर निर्माण को अनुमति दी थी. अब सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने बुधवार को अयोध्या आपराधिक साजिश मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है. 

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपी हैं, जिनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती और अन्य शामिल हैं. इस महीने की शुरुआत में, सीबीआई अदालत ने सभी 32 आरोपियों के बयान दर्ज करके मामले में सभी कार्यवाही पूरी कर ली. वकील केके मिश्रा ने कहा कि सीबीआई अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है.

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केके मिश्रा मामले के 32 में से 25 आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुधीर कक्कड़, सतीश प्रधान, राम चंद्र खत्री, संतोष दुबे और ओम प्रकाश पांडे, कल्याण सिंह, उमा भारती, राम विलास वेदांती, विनय कटियार, प्रकाश शारना, गांधी यादव, जय भान सिंह, लल्लू सिंह कमलेश त्रिपाठी, बृजभूषण सिंह, रामजी गुप्ता, महंत नृत्य गोपाल दास, चंपत राय, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, धर्मदास, जय भगवान गोयल, अमरनाथ गोयल, साध्वी ऋतंभरा, पवन पांडे, विजय बहादुर, विजय बहादुर और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर मामले के आरोपी हैं.

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पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई करने वाली विशेष सीबीआई अदालत की समयसीमा को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया था. अयोध्या मामले में फैसला सुनाने की शीर्ष अदालत की समय सीमा 31 अगस्त को समाप्त हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 19 जुलाई, 2019 को अयोध्या मामले में आपराधिक मुकदमे को पूरा करने के लिए छह महीने की समय सीमा बढ़ा दी थी और अंतिम आदेश के लिए नौ महीने की समय सीमा भी निर्धारित की थी.

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