कोरोना का इलाज करते-करते बीमार हुई डॉक्टर की जान बचाने को योगी ने दिए डेढ़ करोड़

Smart News Team, Last updated: Wed, 7th Jul 2021, 10:21 AM IST
  • राममनोहर लोहिया संस्थान की डॉक्टर सुमन शारदा ने कोरोना काल में कई लोगों की मदद की. प्रेगनेंट होने के बावजूद उन्होनें लीव नहीं ली और कई कोविड संक्रमित महिलाओं का प्रसव कराया. इस बीच वह खुद संक्रमित हो गईं और उनके फेफड़े डैमेज हो गए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनकी मदद को आगे आए हैं. 
राममनोहर लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉक्टर के फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में मदद के लिए आगे आए सीएम योगी आदित्यनाथ.

लखनऊ. कोरोना काल में दूसरों की जान बचाने वाली राममनोहर लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉक्टर शारदा सुमन 45 दिनों से इकमो मशीन के सहारे सांस लेकर जिंदा है. डॉक्टर सुमन की जान बचाने के लिए लोहिया संस्थान के डॉक्टरों समेत डॉयरेक्टर ने सीएम योगी से मदद मांगी थी. डॉ. सुमन के फेफड़े कोरोना संक्रमण के कारण खराब हो गए थे जिनके ट्रांसप्लांट के लिए मुख्यमंत्री योगी ने मदद का हाथ बढ़ाया है. कोरोना वॉरियर की जान बचाने के लिए सीएम योगी ने डेढ़ करोड़ रुपए की मदद की है.

हिंदुस्तान अखबार में छपी खबर के बाद मुख्यमंत्री योगी ने इस मामले पर संज्ञान लिया. सीएम योगी ने डॉ. शारदा सुमन की मदद करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है. बता दें कि राम मनोहर लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉक्टर सुमन ने अपनी परवाह ना करते हुए कोरोना काल में मरीजों का इलाज किया. वो खुद कोरोना संक्रमित हो गईं और उनके फेफड़े खराब हो गए थे. जिसके बाद उनके फेफड़े खराब हो गए. रेजिडेंट डॉक्टर सुमन शारदा 45 दिनों से जिंदगी के लिए जंग लड़ रही हैं. वह लोहिया संस्थान में ही ईकमो मशीन यानी आर्टिफिशियल लंग्स व हार्ट मशीन पर हैं.

राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सक अपने रेजिडेंट डॉक्टर को बचाने की हर संभव कोशिश में जुटा है. संस्थान की डायरेक्टर डॉ. सोनिया नित्यानंद और हाई लेवल चिकित्सकों की टीम ने सीएम योगी से मुलाकात करके डॉ. शारदा के लंग्स ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी थी. 

हिंदुस्तान अखबार में छपी खबर.

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फेफड़ा प्रत्यारोपण पर करीब 50 लाख का खर्च आना है. मरीज को चेन्नई, मुंबई या बंगलुरू के सेंटर में शिफ्ट करने पर 15 लाख रुपये का खर्च अलग से आएगा. इसी तरह दूसरी जांच व प्रत्यारोपण के बाद इलाज में 80 से 85 लाख रुपये का खर्च आएगा.

लोहिया संस्थान में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जूनियर रेजिडेंट पर पर तैनात डॉ. शारदा सुमन की हाल ही में शादी हुई थी. पति भी बतौर रेजिडेंट डॉक्टर कार्यरत हैं. प्रेगनेंट होने के बावजूद शारदा सुमन कोरोना मरीजों का इलाज करती रहीं. अपनी परवाह किए बिना उन्होनें कई कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव भी कराया. 

12 अप्रैल को डॉ. सुमन को बुखार आया जिसके बाद 14 अप्रैल को वह कोरोना संक्रमित पाई गईं. सांस में तकलीफ होने के कारण लोहिया के कोविड वार्ड में डॉ. सुमन को एडमिट कराया गया था. एक मई को डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर ही डॉ. शारदा सुमन की सफल डिलीवरी कराई थी लेकिन उनकी तबीयत में अबतक सुधार नहीं आया है. उम्मीद है कि फेफड़े ट्रांसप्लांट होने के बाद उनकी सेहत में सुधार आ जाएगा.

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