प्रियंका गांधी पर कविता चोरी का आरोप, कवि ने कहा- घटिया राजनीति के लिए...

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 18th Nov 2021, 7:32 PM IST
  • कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पर पुष्यमित्र उपाध्याय नाम के कवि ने कविता चोरी का आरोप लगाया. पुष्यमित्र ने कहा कि उनकी कविता “उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो” काफी व्यापक है, ये घटिया राजनीति के लिए नहीं है. बता दें कि चित्रकूट में नारी संवाद को संबोधित करते हुए प्रियंका ने इस कविता की पंक्तियां पढ़ी थीं.
प्रियंका पर इस कवि ने लगाया कविता चोरी का आरोप, कहा- घटिया राजनीति के लिए...

लखनऊ. यूपी चुनाव 2022 में लगातार रैली और सभाएं कर कांग्रेस पार्टी के लिए जनाधार जुटाने में लगी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अचानक कविता चोरी विवाद में फंस गई. प्रियंका पर कविता चोरी का आरोप पुष्यमित्र उपाध्याय नाम के कवि ने लगाया है. पुष्यमित्र ने आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि चित्रकूट में नारी संवाद में प्रियंका ने जो कविता पढ़ी वो उनकी थी और उनको इस पर आपत्ति है. जिसके बाद से यह मामला सोशल मीडिया में तूल पकड़ रहा है. कई यूजर्स इसमें प्रियंका गांधी को तो कई पुष्यमित्र को ट्रोल कर रहे हैं.

बता दें कि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी किनारे रामघाट पर प्रियंका गांधी ने महिलाओं के साथ संवाद किया था. इस दौरान उन्होंने 'उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो' काव्य की पंक्तियां पढ़ीं, लेकिन इस कविता को लिखने वाले कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताते हुए उन पर कविता चोरी का आरोप लगाया.

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कविता समाज के लिए राजनैतिक लाभ के लिए नहीं

पुष्यमित्र ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के उस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा कि प्रियंका गांधी ये कविता मैंने देश की स्त्रियों के लिए लिखी थी न कि आपकी घटिया राजनीति के लिए. न तो मैं आपकी विचारधारा का समर्थन करता हूं और न आपको अनुमति देता हूं कि आप मेरी साहित्यिक संपत्ति का राजनैतिक उपयोग करे. कविता भी चोरी कर लेने वालों से देश क्या उम्मीद रखेगा. कविता समाज के लिए है राजनैतिक लाभ के लिए नहीं.

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राजनीतिक संस्थानों से अनुरोध न करें इसका मर्म दूषित

पुष्यमित्र ने लिखा कि ये कविता 2012 में निर्भया प्रकरण के बाद लिखी गई थी. इस कविता का संदेश औऱ आह्वान आपकी राजनीतिक कुंठाओं से अलग और व्यापक है. मैं राजनीतिक संस्थानों से अनुरोध करूंगा कि कविता का प्रयोग क्षुद राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए करके इसके मर्म को दूषित न करें.

 

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