अर्थव्यवस्था में आपदा और आपदा में अवसर मोदी का मास्टरस्ट्रोक है: प्रियंका गांधी

Smart News Team, Last updated: Tue, 1st Jun 2021, 8:43 PM IST
  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने माइनस जीडीपी, बेरोज़गारी और महंगाई के आंकड़ों को शेयर करते हुए ट्वीट किया और कहा “अर्थव्यवस्था में आपदा और आपदा में अवसर” यही मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक है.
प्रियंका गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना.

लखनऊ। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी की सरकार पर डूबती अर्थव्यवस्था को लेकर निशाना साधा. प्रियंका गांधी ने माइनस जीडीपी, बेरोज़गारी और महंगाई के आंकड़ों को शेयर करते हुए ट्वीट किया और कहा “अर्थव्यवस्था में आपदा और आपदा में अवसर” यही मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक है.

प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया कि विकास दर: -7.3, बेरोजगारी दर: 12%, दूसरी लहर: 1 करोड़ नौकरियां खत्म, 2020: 97% लोगों की आय घटी, पेट्रोल- 100 रुपये, सरसों का तेल- 200 रुपये, रसोई गैस- 809 रुपये. “अर्थव्यवस्था में आपदा और आपदा में अवसर” यही मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक है."

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गौरतलब है कि सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च तक के जीडीपी के आंकड़े जारी किए गए थे. सरकार का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में चौथी तिमाही के दौरान 1.6 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है, वहीं वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 7.3 फीसदी की गिरावट आई है.

देश की लगातार बिगड़ रही अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने भी केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है. इसी संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में आई 7.3 प्रतिशत की गिरावट को लेकर कहा कि अगर 2021-22 में ऐसी स्थिति से बचना है तो सरकार को अपनी गलतियां स्वीकार करते हुए विपक्ष एवं अर्थशास्त्रियों की सलाह सुननी चाहिए.

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इतना ही नहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2020-21 की अर्थव्यवस्था को देखते हुए इसे पिछले चार दशकों का ‘सबसे अंधकारमय’ साल बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के साथ ही साथ सरकार के ‘अकुशल एवं अक्षम आर्थिक प्रबंधन’ हालात और बिगड़ गए.

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आगे कहा, ‘‘जिसका अंदाजा लगाया जा रहा था, वही हुआ. पिछले वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.’’ 2018-19 में जीडीपी 140,03,316 करोड़ थी. 2019-20 में यह 145,69,268 करोड़ रुपये थी और 2020-21 में यह घटकर 135,12,740 करोड़ रुपये हो गई. यह देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को बताता है". उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ‘‘साल 2020-21 पिछले चार दशक में देश की अर्थव्यवस्था का सबसे अंधकारमय साल रहा है. चारों तिमाही के आंकड़े अर्थव्यवस्था की कहानी बयां करते हैं.’’

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