सावधान! फेक वेबसाइट बना LPG डीलरशिप देने के नाम पर ठग लिए 7 लाख

Mithilesh Kumar Patel, Last updated: Fri, 31st Dec 2021, 11:00 PM IST
  • लखनऊ के कृष्णानगर कोतवाली अंतर्गत अलीनगर सुनहरा इलाके का एक शख्स साइबर ठगों के बिझाएं जाल में फंसकर 7 लाख रुपए गवां दिया. शातिर ठगों ने एलपीजी डीलर बनाने के लिए www.lpgvitarakchayan.in नाम से फेक वेबसाइट बनाया था. एलपीजी डीलरशिप लेने के लिए शख्स ने इस फर्जी वेबसाइट का सहारा लिया और ठगा गया.
फेक वेबसाइट बना LPG डीलरशिप देने के नाम पर लगाया 7 लाख का चुना

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर कोतवाली थाना क्षेत्र से साइबर ठगी के जरिए 7 लाख रुपये ऐंठने का मामला सामना आया है. शातिर साइबर जालसाज ने एलपीजी वितरक चयन नाम से फर्जी वेबसाइट (www.lpgvitarakchayan.in) बना कर इलाके के अलीनगर सुनहरा निवासी शख्स से करीब 7 लाख रुपये ठग लिया है. जालसाजों नें उन्हें एलपीजी डीलरशिप देने के नाम पर लाखों रुपये का चुना लगाया है. ठगी का शिकार हुए शख्स ने मामलें की शिकायत थाने पहुचकर दी है. थाना कृष्णानगर कोतवाली इंस्पेक्टर आलोक राय ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. पीड़ित शख्स ने अपनी शिकायत में दर्ज कराया है कि जालसाजों ने खुद हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कर्मी होने का दावा कर और उन्हें रुपये एक बैंक खाते में जमा करने के लिए कहा था. लगातार रुपयों की मांग किए जाने पर उन्हें को शक हुआ था.

साइबर ठगी का मामला कृष्णानगर कोतवाली इलाके के अलीनगर सुनहरा का है. पीड़ित शख्स मयंक तिवारी अलीनगर सुनहरा का रहने वाला है. वह एलपीजी वितरक बनने के लिए डीलरशिप लेना चाहते था. डीलर बनने के लिए मयंक ने संबंधित कीवर्ड इंटरनेट पर सर्च किया. जिसके बाद उसके कंप्यूटर स्क्रीन पर इस नाम www.lpgvitarakchayan.in की वेबसाइट सामने नजर आई. मयंक ने संबंधित लिंक पर क्लिक कर विजिट किया. काफी देर तक वेबसाइट चेक करने के बाद पीड़ित मयंक ने रजिस्ट्रेशन लिंक पर चटका लगाकर फार्म भरा था. मयंक के मुताबिक, बीते 5 नवंबर को उनके मोबाइल पर एक अंजान नम्बर से कॉल आया था. रिसीव करने पर कॉल करने वाले शख्स ने खुद को हिन्दुस्तान पेट्रोलिय कर्मी बताया था. कॉल करने वाले जालसाज ने मोबाइल पर मयंक को बताया कि आपका चयन डीलरशिप के लिए हो गया है. इसके बाद कथित हिन्दुस्तान पेट्रोलिय कर्मी ने मयंक को अपने वरिष्ठ अधिकारी का नंबर बोलकर एक और नया मोबाइल नम्बर दिया. पीड़ित मयंक ने जब उस नए नंबर पर कॉल किया तो रिसीव करने वाले शख्स ने खुद को हिन्दुस्तान पेट्रोलिय कम्पनी का वरिष्ठ अधिकारी बताया था. कथित वरिष्ठ अधिकारी ने कॉल के दौरान मयंक को एक इमेल आईडी बताया और उस पर सारी डिटेल भेजने को कहा. कथित वरिष्ठ अधिकारी की बातों पर विश्वास कर मयंक ने एलपीजी डीलरशिप हासिल करने के लिए बताए अनुसार बिना कुछ सोचे समझें अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के कागज, कैंसिल चेक और 2 फोटो भेज दिया. मयंक ने मुताबिक उसे 8 नवंबर को जालसाजों के संबंधित हिन्दुस्तान पेट्रोलिय कम्पनी की तरफ से एक कंफर्मेशन मेल आया था. इस मेल के साथ मयंक को कुछ बैंक अकाउंट डिटेल भी अटैच करके भेजा गया था.

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मयंक ने बताया कि ई-मेल आईडी के साथ मिला बैंक अकाउंट हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के नाम से था. बताये गए बैंक खाते में उन्होंने पहली बार 18 हजार 500 रुपये जमा किए थे. उसके बाद उनकी मांग पर अलग-अलग दिनों में करीब 6 लाख 80 हजार रूपए और जमा किए. जब तक मयंक रूपए जमा करते रहे उस बीच मोबाइल पर उनकी बातचीत कई लोगों से होती रही. इस दौरान मयंक से जो भी बात करता वह खुद को हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कंपनी का कर्मी बताता था. जालसाजों के द्वारा साइबर ठगी के झांसे में आए मयंक ने बताया कि 27 दिसंबर को गिरोह के साथ आखिरी मीटिंग होनी थी. लेकिन उससे पहले ही सभी जालसाजों का मोबाइल नम्बर स्विच ऑफ हो गया. मयंक काफी प्रयास के बाद भी उन सब से सम्पर्क नहीं कर सकें. पीड़ित मयंक ने उन्हें ई-मेल भी भेजा मगर उधर से भी कोई जवाब नहीं मिला. जालसाजों के गिरोह में फंसने का शक होने के बाद पीड़ित मयंक ने थाने में शिकायत की.

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