दवा व्यापारियों ने LDA के खिलाफ PGI के बाहर मेडिकल मार्केट में की तालाबंदी

Smart News Team, Last updated: 06/12/2020 06:20 PM IST
लखनऊ के पीजीआई के सामने बनी मेडिकल मार्किट में एलडीए द्वारा तीन दुकानों को अवैध बताकर गिराने की नोटिस का रविवार को दवा व्यवसाइयों ने विरोध करते हुए अनिश्चित कालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
दवा व्यापारी लखनऊ पीजीआई के बाहर तालाबंद कर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए.

लखनऊ: प्रदेश के प्रमुख अस्पताल पीजीआई के बाहर पड़ने वाले मेडिकल स्टोर के व्यापारियों ने रविवार को अपनी दुकानों में ताल जड़कर प्रदर्शन किया. दुकानदारों ने ये प्रदर्शन एलडीए द्वारा कुछ दुकानों को अवैध घोषित कर उसमें नोटिस चस्पा कर दिया था. उस नोटिस में अवैध घोषित की गई 3 दुकानों को तोड़ने का फिर फरमान था. जब यह बात अन्य दुकानदारों को पता चली तो उन्होंने पीजीआई के सामने हंगामा हरते हुए इसका विरोध किया.

पीजीआई मेडिकल और सर्जिकल शॉप असोसिएशन के बैनर तले कई दुकानें अस्पताल के सामने खुली है. जहां पर कई दवा व्यवसायी मेडिकल की दुकानें खोले हुए है. शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वहां की तीन दुकानों को अवैध घोषित कर दिया. अवैध घोषित करने के बाद एलडीए ने उन दुकानों को गिराने का भी नोटिस चस्पा कर दिया. ये बात जब अन्य दवा व्यवसाइयों को पता चली तो उन्होंने रविवार को सभी दुकानों में तालाबंदी कर दी. 

25 साल पहले UP से गुम बुजुर्ग राजस्थान में मिले, सोशल मीडिया की मदद से घर पहुंचे

दुकानों में तालाबंदी के बाद दवा दुकान के मालिक पीजीआई के सामने एलडीए के इस फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया. साथ ही पूरे मेडिकल मार्किट को बंद करके अनिश्चित कालीन प्रदर्शन पर चले गए. नाराज दवा व्यवसाइयों ने विरोध प्रदर्शन करने के बाद डीएम को इस मामले से सम्बंधित ज्ञापन भी सौंपा.

8 दिसंबर के भारत बंद और किसान आंदोलन पर CM योगी ने अधिकारियों को दिए ये आदेश

एलडीए द्वारा उठाए गए इस कदम पर दवा व्यवसाइयों ने कहा कि पीजीआई के सामने बनी हुई दुकाने करीब 30 साल पहले से बनी है. इस मेडिकल मार्किट में तकरीबन 45 दुकाने है. पूरा मेडिकल मार्किट के व्यवसायी एलडीए के विरोध में है. साथ ही लखनऊ के कई व्यापारी संगठनों ने हमारे समर्थन में आकर यहां पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

लखनऊ की ऑइकोनिक ओलंपिक ने 1.35 करोड़ रुपये में खरीदी टीम

IIT पटना के छात्र को भारतीय कंपनी ने दिया सालाना 43 लाख का पैकेज

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें