डॉक्टरों की हड़ताल से लखनऊ में 50 हजार मरीज बिना इलाज लौटे, 15 सौ ऑपरेशन टले

Smart News Team, Last updated: 11/12/2020 05:41 PM IST
आईएमए ने शुक्रवार को हड़ताल आयुर्वेद को सर्जरी दिए जाने से काफी बड़ी हड़ताल की हुई थी. जिसके चलते रोजाना आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लेकिन, इसके बावजूद चिकित्स टस से मस नहीं हुए और अपनी मांगों पर अड़े रहे.
आईएमए की हड़ताल को लेकर शुक्रवार को डॉक्टरों ने कोई काम नहीं किया.

लखनऊ: आयुर्वेदिक विशेषज्ञों को सर्जरी का अधिकार दिए जाने पर आज आईएमए ने हड़ताल की. इसका असर लखनऊ में इलाज कराने आए मरीजों पर देखने को मिला. इनकी ये बंदी सुबह छह से शाम छह बजे तक रखी थी. देशव्यापी बंदी से दूर दराज से आए पेशेंट को भी वापस लौटने पड़ा. आपको बता दें कि प्राइवेट अस्पताल, पैथोलॉजी, डॉयग्नोस्टिक और निजी डॉक्टर अपने-अपने क्लीनिक पर भी नहीं बैठे.

वहीं, आज करीब 50 हजार मरीज बिना इलाज के लौटे और 1500 ऑपरेशन टाल दिए गए. आपको बता दें कि आईएमए से संबंधित 1500 डॉक्टर लखनऊ में रजिस्टर्ड हैं. जिनमें से 750 पंजीकृत अस्पताल और 780 पैथोलॉजी, डॉयग्नोस्टिक सेंटर और क्लीनिक में कार्य करते हैं. इन्हीं के पास रोजाना 50 हजार मरीज आते हैं. शुक्रवार को आए कुछ मरीज तो दर्द से तड़पते रहे, लेकिन उन्हें इलाज के नाम पर कुछ नहीं मिला. इसके बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें देखने की जहमत नहीं उठाई.

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इनके अलावा गोमती नगर लोहिया अस्पताल के सामने वसुधा पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर में रूटीन जांचें भी नहीं हुईं. हेल्थ सिटी अस्पताल में ओपीडी मरीज भी नहीं देखे गए. इसके साथ ही कोई ऑपरेशन भी नहीं दिया गया. साथ ही प्रदेश के लोगों के लिए सबसे ज्यादा कारगर पीजीआई के निकट पड़ने वाले सारे पैथोलॉजी बंद रहें.

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष रमा श्रीवास्तव और पूर्व अध्यक्ष पीके गुप्ता ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सक अपनी क्षेत्र के मरीजों का इलाज करें. यदि वे सर्जरी से जैसे बड़ा कार्य करेंगे तो यह जनता के हित में नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि यह मिक्सोपैथी एलोपैथ डॉक्टरों के साथ ही साथ मरीजों के लिए काफी हानिकारक है. वहीं, उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले सरकार बिना देरी किए वापस ले.

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