UP में संदिग्ध और नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्र जांच का खर्चा उठाएगा विभाग

Smart News Team, Last updated: Tue, 2nd Feb 2021, 2:28 PM IST
उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग अब से संदिग्ध और नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन का खर्चा खुद वहन करेगा. महा निदेशक स्कूल शिक्षा करण विजय आनंद में इसके लिए सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है.
उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग संदिग्ध और नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच का खर्चा उठाएगा.

लखनऊ. शिक्षा विभाग में संदिग्ध या फर्जी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन का खर्चा अब आकस्मिक मद से किया जाएगा. इसके अलावा नए नियुक्त होने वाले शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए भी विभाग रुपए खर्च करेगा. गौरतलब है कि कई जिलों में जांच प्रक्रिया सत्यापन के शुल्क के कारण अटक गई थी. इसके बाद इस संबंध में कई जिलों ने शासन से मार्गदर्शन मांगा था. माध्यमिक शिक्षा विभाग में सत्यापन का खर्चा शिक्षकों से लिया जा रहा है.

आपको बता दें कि महा निदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इसके लिए सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि प्रति विकासखंड 50 हज़ार तक इस पर खर्च किए जा सकते हैं. यदि किसी ब्लॉक में इससे ज्यादा खर्च हो तो इसका अतिरिक्त खर्चा किसी ऐसे ब्लॉक से समायोजित किया जाएगा, जहां कम रुपये खर्च हो रहे हो. विभिन्न विश्वविद्यालयों में सत्यापन के लिए अलग-अलग शुल्क लेते हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, प्रयागराज, सैम हिंगिसबॉटम विश्वविद्यालय 500-500 रुपये और छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर ने इसके लिए 300 रुपये शुल्क ले रहे हैं. इसी तरह अन्य विश्वविद्यालय के शुल्क भी अलग-अलग हैं.

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ज्ञात हो कि जुलाई, 2020 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में फर्जी शिक्षकों के तैनात होने का मामला सामने आया था. इसके बाद सरकार ने सभी प्राइमरी और माध्यमिक स्कूलों में तैनात शिक्षकों और शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्र सत्यापन के आदेश दिए थे. इसमें मामला संदिग्ध आने पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालय से करवाया जाना है.

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