कोयले की कमी से प्रदेश में बढ़ा बिजली संकट, खरीदनी पड़ रही दोगुने रेट पर बिजली

Shubham Bajpai, Last updated: Thu, 14th Oct 2021, 11:41 AM IST
  • प्रदेश में कोयले की कमी से बिजली का संकट गहराता जा रहा है. जिस वजह से लगातार बिजली आपूर्ति करने के लिए सरकार को सामान्य रेट से करीब दोगुने रेट से निजी बिजली कंपनियों से बिजली लेनी पड़ रही है. सीएम योगी के लगातार बिजली आपूर्ति के निर्देश के बाद से शेड्यूल अनुसार बिजली की आपूर्ति की जा रही है.
कोयले की कमी से प्रदेश में बढ़ा बिजली संकट, खरीदनी पड़ रही दोगुने रेट पर बिजली

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में शेड्यूल के अनुसार बिजली देने के निर्देश दिए गए हैं. जिसको लेकर मंगलवार से काम शुरू किया गया. वहीं, प्रदेश में कोयले की कमी की वजह से बिजली की आपूर्ति का संकट बढ़ता जा रहा है. जिससे कारपोरेशन को सामान्य दर से अधिक में बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिससे कारपोरेशन में कर्ज और बढ़ता जा रहा है.

मंगलवार रात को ही देनी पड़ी 33 करोड़ की बिजली

मंगलवार से शेड्यूल के अनुसार बिजली की आपूर्ति शुरू हुई. इस दौरान बिजली की कमी को पूरा करने के लिए 33 करोड़ में 23 मिलियन यूनिट बिजली की खरीदी की गई. यह बिजली कंपनियों ने 17 रुपये यूनिट के अनुसार सरकार को बेची. जबकि नार्मल रेट 6 रुपये यूनिट से भी कम हैं. जिसको लेकर राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि एनर्जी एक्सचेंज के नाम पर निजी कंपनियों द्वारा मुनाफाखोरी की जा रही है.

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इस शेड्यूल के अनुसार हो रही बिजली की आपूर्ति

मंगलवार से शेड्यूल के अनुसार बिजली की आपूर्ति शुरू की गई. इसके अनुसार, ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे, तहसील के इलाकों में साढ़े 21 घंटे, जिला मुख्यालय में 24 घंटे, मंडल मुख्यालय में 24 घंटे, बुंदेलखंड में 20 घंटे, महानगर में 24 घंटे और औद्योगिक इलाकों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाएगी.

जितनी बिजली की जरूरत उतनी करें उपभोक्ता

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि दो दिनों से सीएम योगी के निर्देशानुसार, निर्बाध बिजली की आपूर्ति की जा रही है. जिसके लिए कंपनियों से अधिक दाम पर सरकार बिजली खरीदी कर रही है. ऐसे में उपभोक्ता को जितनी जरूरत हो उतनी ही बिजली उपयोग करें. वहीं, कारपोरेशन के चेयरमैन एम.देवराज दावा कर रह हैं कि पहले से राज्य में बिजली की आपूर्ति बेहतर हुई है.

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सभी इकाइयों में हो रहा कम बिजली उत्पादन

राज्य में राज्य विद्युत उत्पादन के प्लांटों, प्रदेश की विद्युत आपूर्ति करने वाली निजी कंपनियां और एनटीपीसी की इकाइयों में कम बिजली का उत्पादन हो रहा है. आंकड़ों के अनुसार, राज्य विद्युत उत्पादन की इकाइयों में 700 मेगावाट, निजी कंपनियों में 1800 मेगावाट और एनटीपीसी की इकाइयों में 600 मेगावाट बिजली कम बनी है. वहीं, राज्य में बुधवार को ही 20269 मेगावाट बिजली की जरुरत थी.

 

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