KGMU में अब महज पांच मिनट में होगा आंख का ऑपरेशन, जानें इस तकनीक की विशेषताएं

ABHINAV AZAD, Last updated: Sun, 19th Dec 2021, 12:23 PM IST
  • KGMU में अब लेजर तकनीक से डायबिटिक रेटीनोपैथी पीड़ित का ऑपरेशन संभव हो गया है. लेजर तकनीक से डायबिटिक रेटीनोपैथी पीड़ित के आंख का ऑपरेशन महज पांच मिनट में संभव हो सकेगा. वहीं डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सफलतादर में भी इजाफा होने का दावा किया है.
(प्रतीकात्मक फोटो)

लखनऊ. आंख के मरीजों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) में डायबिटिक रेटीनोपैथो का इलाज आसान हो गया है. अब लेजर तकनीक से डायबिटिक रेटीनोपैथी पीड़ित का ऑपरेशन संभव हो गया है. इस तकनीक से अब महज पांच मिनट में आंख का ऑपरेशन संभव होगा. जबकि इससे पहले आधे घंटे का वक्त लगता था. वहीं डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सफलतादर में भी इजाफा होने का दावा किया है. सरकार की ओर से केजीएयमू में एडवांस डायबिटिक रेटीनोपैथी सेंटर स्वीकृत किया गया है.

दरअसल, केजीएयमू में एडवांस डायबिटिक रेटीनोपैथी सेंटर स्वीकृत होने के बाद कई नई सुविधाएं मिलेंगी. वहीं आधुनिक मशीनों से विभाग को लैस किया जा रहा है. नेत्र रोग विभाग के डॉ. संदीप सक्सेना के मुताबिक, अनियंत्रित डायबिटिक पीड़ित मरीजों को आंख संबंधी बीमारी का खतरा कई गुना अधिक रहता है. मेडिकल साइंस में इसे इसे डायबिटिक रेटीनोपैथी कहा जाता है. नेत्र रोग विभाग के डॉ. संदीप सक्सेना आगे बताते हैं कि इसमें आंख के पर्दे में सूजन आ जाती है. कई बार मरीज की आंख में रक्त का थक्का जम जाता है. इसका ऑपरेशन से सटीक इलाज होता. अभी तक ऑपरेशन में आधे घंटे का वक्त लगता था.

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अब केजीएमयू हाई एंड मल्टी स्पॉट लेजर मशीन तकनीक से लैस हो गया है. साथ ही स्टेट ऑफ आर्ट लेजर मशीन भी खरीदी गई है. वहीं लेजर मशीन से सटीक व बेहतर ऑपरेशन संभव हो गया है. नेत्र रोग विभाग के डॉ. संदीप सक्सेना ने बताया कि अब तक हमारे पास जो मशीन थी वो वन स्पॉट थी. यानी एक बार में एक स्पॉट ही लेजर का कवर करती थी. जबकि इस मशीन के माध्यम से एक बार में 20 स्पॉट लेजर के मारती है. उन्होंने आगे बताया कि महज पांच से सात मिनट में ऑपरेशन संभव है. वहीं विट्रेक्टमी मशीन भी खरीदी गई है. इससे आंख के पर्दे की अब और बेहतर सर्जरी हो सकेगी.

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